Masala Diary

कामवाली बाई

थी तो वह कामवाली बाई ही पर उसके अपने ठसके, नखरे थे. मदमाती चाल से अपॉर्ट्मेंट में घुसती तो गार्ड्स से लेकर सारे कर्मचारियों की नजर उस पर टिक जाती और चेहरे से फिसलते हुए छाती, पेट, पतली कमर से होते हुए उसके भारीभरकम बम पर ही जाकर रुकती. इस अपार्टमेंट की छ्म्मकछ्ल्लो थी वह. अपने ऊपर आदमियों के नजर की इस फिसलन को वह खूब पहचानती और मन ही मन मजा लेती.

उसी अपॉर्टमेंट के एक फ्लैट में नवीन रहता था. उम्र थी बत्तीस. वह शादीशुदा था पर अभी बीवी को नहीं लाया था. कॉल सेंटर में नई-नई नौकरी लगी थी उसकी. कभी दिन की शिफ्ट तो कभी रात की. ऐसे में उसके खाने-पीने से लेकर कपड़ा-लत्ता की देखभाल आदि की जिम्मेदारा लाजो पर ही थी. चूंकि उसके ऑफिस जाने के समय लाजो काम करने नहीं आ पाती थी, इसलिये एक चाबी उसके पास होती.

काम करके ताला बंद करके वह चली जाती. सामान चोरी होने का कोई डर नहीं होता था क्योंकि गेट पर तैनात गार्ड्स सब के सामान की तलाशी लेते. शनिवार-इतवार को उसकी छुट्टी रहती. लाजो उस दिन और ज्यादा बन-संवर कर आती. कमर के नीचे से लहंगे को पहनती और फर्श की सफाई के दौरान चुन्नी को छातियों के बीच में से ले जाकर नीचे बांधती.

ऐसे में उसकी गोरी कमर, उभार और बड़े बम और भी बाहर निकल से आते. नवीन जैसे ही उसे कनखियों से निहारता वह अपने बदन को ऐसे मोड़ती की नवीन होश खोने सा लगता. कुछ दिन तक दोनों के बीच देखादेखी और अनजान बने रहने का यह खेल चला. फिर शरीर की आग ने जोर पकडा और एक दिन बिना कुछ कहे नवीन ने लाजो को पकड़ लिया.

लाजो तो जैसे इसी इंतजार में थी. उसने नवीन को वह मजा दिया कि अब वह ओफिस में भी उसे ही याद करता रहता. सोचता रहता कि कब छुट्टी आए और वह लाजो को इस तरह, उस तरह, सोफे पर, बिस्तर में, बाथरूम में, किचन में और हो सके तो छत पर प्यार करे.

बीवी के साथ न रहने से उसे जो सुख नहीं मिलता था, उसकी कमी अब लाजो पूरा करने लगी थी. लाजो उसकी छुट्टी के दिन उसके पास ज्यादा समय रहने लगी. वह अब उसके बटुए में से पैसे भी निकाल लेती. नवीन उसे मना नहीं करता. पर यह सब कुछ दिन ही चला.

एक बार लाजो ने उससे एक बड़ी रकम मांग दी. नवीन ने मना कर दिया, तो लाजो भड़क गयी और उस पर अपनी इज्जत पर हाथ डालने का इल्जाम लगाने की धमकी देने लगी. नवीन के पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी. कहां तो उसे लग रहा था कि बीवी के न होने पर लाजो के चलते उसके दोनों हाथों में लड्डू हैं. पर यहां तो इज्जत के ही लाले पड़ गए. उसने लाजो को पैसा दे दिया. गांव का टिकट कटाया और परिवार लेकर लौटा तो न केवल वह अपार्ट्मेंट बल्कि उस कॉलोनी से ही दूर चला गया. लाजो ने उसे एक सीख दे दी थी.

Laoding...