Masala Diary




सीएम का पद गया, दे दी जान

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल को इसी जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पद छोड़ना पड़ा था....
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल को इसी जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पद छोड़ना पड़ा था. अपनी कुर्सी जाने से कलिखो इतने सदमे में रहे होंगे इसका गुमान किसी को न था. हालांकि कलिखो काफी समय से लोगों से मिल नहीं रहे थे, पर वे अपनी जान दे देंगे यह सोच से परे था. जिस आवास में वह मुख्यमंत्री बन कर गए थे, उसी घर में पंखे से लटकता उनका शव पाया गया. 47 साल के कलिखो पुल ने सुसाइड कर लिया, यह उनके समर्थक अब भी मानने को तैयार नहीं. \n\n लकडी का सामान बनाने वाले कारपेंटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले पुल कभी गार्ड भी रहे थे. बीस जुलाई 1969 में अंजाव जिले के हवाई सर्किल के वाल्ला गांव में ताइलुम पुल और कोरानलु पुल के घर में कलिखो का जन्म हुआ. पुल ने लोहित जिले के तेजू के इंदिरा गांधी सरकारी कालेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की. उनकी राजनीतिक पारी 1995 में शुरू हुई जब वह हायुलियांग सीट से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद पुल ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा. वह लगातार पांच बार जीते और बिजली, वित्त, भूमि प्रबंधन जैसे विभाग संभाले. \n\n पुल को अरुणाचल प्रदेश के सबसे कम समय के मुख्यमंत्री के रुप में भी याद किया जाएगा. उन्होंने दो महीने के राजनीतिक संकट के बाद इस साल 19 फरवरी को राज्य की कमान अपने हाथ में ली थी, लेकिन पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने उनकी सत्तारुढ सरकार को अपदस्थ कर दिया और आदेश दिया था कि अरुणाचल में कांग्रेस की सरकार बहाल हो. दिसंबर 2015 तक कांग्रेस के साथ रहे पुल ने पार्टी से बगावत की और फरवरी में भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने. हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस नियुक्ति को अवैध करार दिया. बाद में नबाम तुकी को बहाल किया, जिसके बाद पेमा खांडू 10वें मुख्यमंत्री बने. \n\n पुल वित्त राज्यमंत्री (1995-97), बिजली राज्यमंत्री (1997-99), वित्त राज्यमंत्री (1999-2000), भूमि प्रबंधन राज्यमंत्री (2002-03) और फिर वित्त राज्यमंत्री (2003-05) रहे. वह एक उच्चशक्ति प्राप्त समिति के भी अध्यक्ष रहे तथा करीब एक साल मुख्यमंत्री के सलाहकार का जिम्मा भी संभाला. वर्ष 2006-09 में वह वित्त मंत्री, फिर ग्रामीण कार्य मंत्री (2009-11), और फिर स्वास्थ्य मंत्री रहे. 2011 से 2014 के बीच वह मुख्यमंत्री के सलाहकार भी रहे और 2014 में फिर से मंत्री बने. पुल की सामाजिक सेवा, सामुदायिक सेवा और गरीबों तथा वंचितों से मिलने में विशेष रुचि थी. \n\n

स्पीकर पर सवाल

हमारी सियासी व्यवस्था में संसद सर्वोच्च है. इससे ऊपर कोई नहीं ,क्योंकि राजनीति के जानकार जानते हैं कि संविधान और राष्ट्रपति भी संसद का ही एक हिस्सा हैं....
हमारी सियासी व्यवस्था में संसद सर्वोच्च है. इससे ऊपर कोई नहीं, क्योंकि राजनीति के जानकार जानते हैं कि संविधान और राष्ट्रपति भी संसद का ही एक हिस्सा हैं. ऐसे में अगर लोकसभा या राज्य सभा के प्रमुखों पर कोई सदस्य आरोप लगाता है तो अचरज होता है. पर हमारे आज के नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं. \n\n तभी तो आंध्र प्रदेश के मुद्दे पर लोकसभा में पिछले सप्ताह भर से जारी हंगामे और नारेबाजी के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने स्पीकर से नाराज हो कर कहा कि यह क्या तरीका है? इस प्रकार हंगामे के बीच कैसे सदन चलाया जा रहा है, तब स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उनके आरोपों का सख्ती से खंडन करते हुए कहा कि कोई भी बात होती है, तो सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाकर विचार-विमर्श किया जाता है. सदन सदस्यों और बहस के लिए ही तो है. \n\n हुआ दरअसल यह कि वाईएसआर कांग्रेस के सदस्यों द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर जब आसन के समक्ष नारेबाजी की जा रही थी, तो सपा मुखिया मुलायम सिंह अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए और आसन से कहा कि कभी हम लोगों को भी बोलने का मौका दें. इस पर जब अध्यक्ष ने उनकी बात को हंसी में उड़ाने की कोशिश की तो मुलायम सिंह नाराज हो गए. \n\n मुलायम फिर रुके नहीं. उन्होंने कहा, ‘आप हंसी में हमारी बात को टाल रही हैं. लोकतंत्र बातचीत से चलता है. बड़े-बड़े स्पीकर देखे हैं हमने.' उन्होंने सदन संचालन के स्पीकर के तौर तरीकों पर सवाल किया. इस पर अध्यक्ष सकते में आ गयीं और उन्होंने नाराजगी के साथ कहा कि आप इस प्रकार बात मत करिए. उन्होंने कहा कि मैंने किसी को बोलने की अनुमति नहीं देने की बात कभी नहीं कही. \n\n स्पीकर ने कहा, ‘मैं नियमों का अनुसरण कर रही हूं जो स्वयं सदन ने बनाए हैं.' उन्होंने साथ ही कहा कि वह सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करती रही हैं.' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री दो बार इस मुद्दे पर बोल चुके हैं और यह संभव नहीं है कि हर मुद्दे का समाधान निकल जाए. \n\n मुलायम सिंह ने कहा कि उन्हें भी सदन का लंबा अनुभव है और वह आसन में विश्वास रखते हैं, लेकिन आसन को परवाह नहीं है कि हम तथा बाकी अन्य सदस्य भी यहां बैठे हैं. उन्होंने सदन में मौजूद गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुखातिब होते हुए कहा, ‘आपकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. हमको बुला लेते, इनको (वाईएसआर कांग्रेस सदस्य) बुला लेते. इनकी मांग जायज हो तो मान लीजिए नहीं जायज है, तो इन्हें संतुष्ट करिए.' \n\n मुलायम ने जिस समय यह मामला उठाया उस समय कांग्रेसी सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे. वे दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं मिलने पर सदन से वाकआउट कर गए थे. अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार तो वह सदन नहीं चला सकतीं. हालांकि बाद में स्थिति संभल गई, पर सवाल तो उठ ही चुके थे. \n\n

यूपी में दलबदल चालू आहे

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं ,वैसे-वैसे वहां खेमा बदलने और सियासी उठापटक के मामले बढ़ते जा रहे हैं...
उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे वहां खेमा बदलने और सियासी उठापटक के मामले बढ़ते जा रहे हैं. दलबदल वहां इतनी तेजी से हो रहा है कि समझ ही नहीं आ रहा कि कौन सा विधायक कब किधर है. दर असल विधायकों में यह खलबली अपनी सीट बचाने को लेकर है. यह अलग बात है कि दल से ज्यादा उन्हें अपने वोटरों को साधना चाहिए पर जाति और दल पर टिकी सियासत के दौर में जनता की परवाह किसे है? \n\n उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होना है, यही कारण है कि सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. सभी राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हैं और अपने-अपने कैडर, वोटर्स को भी समेटने में जुटे हैं. ऐसे में कई ऐसे आयाराम-गयाराम भी हैं, जो उस ओर जाने के लिए तैयार बैठे हैं, जिसका पलड़ा भारी हो. फिलहाल सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को होता दिख रहा है. \n\n यही वजह है कि दस अगस्त को बसपा द्वारा कांग्रेस और सपा के कुल चार विधायकों को अपने दल में शामिल कराने के अगले दिन ही भाजपा ने भी बड़ा धमाका किया. उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की अगुआई में हुए एक समारोह में समाजवादी पार्टी के तीन, बहुजन समाज पार्टी के दो और कांग्रेस के तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए. यह आठों विधायक वहीं हैं, जिन्होंने राज्यसभा की वोटिंग के समय क्रॉस वोटिंग की थी. \n\n कांग्रेस का कहना है कि उसने उन सभी 11 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया था, जिन्होंने पार्टी लाइन के बाहर जाकर वोटिंग की थी. लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि उनके जाने से कांग्रेस को नुकसान होगा. उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के कुल 28 विधायक थे, जिनमें से 11 निकाले जा चुके हैं और जो दूसरी पार्टियों के संपर्क में हैं. ऐसे में कांग्रेस के पास अभी केवल 17 विधायक हैं. \n\n कांग्रेस के विधायकों का कहना है कि‍ पार्टी में सोनिया गांधी - राहुल गांधी से उनके इर्द-गिर्द रहने वाले नेता मिलने नहीं देते थे, इस वजह से हम जनता की परेशानियां उन तक पहुंचा नहीं पा रहे थे. कई बार अमेठी आए राहुल से इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन रवैया नहीं बदला. यही वजह है कि हमें कांग्रेस छोड़ना पड़ा. सपा के विधायक भी पार्टी से सस्पेंडेड हैं. \n\n भाजपा के पूर्व मंत्री जिसने बसपा ज्वाइन की है का भी कहना है कि भाजपा अब व्यक्ति केंद्रि‍त पार्टी हो गई है, इसलिए बसपा ज्वाइन की है. इस बीच बसपा से बगावत करके भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा मुखिया मायावती को दलितों के बजाय चुनाव के टिकट बेचने वाली ‘भ्रष्टाचार की देवी' करार दिया है. जाहिर है आरोपों और अदलाबदली का यह दौर अभी चलेगा. \n\n

गौरक्षकों पे प्रधानमंत्री ने तोड़ी चुप्पी, बोले असामाजिक तत्वों को दंडित किया जाए

देश में गौरक्षा के नाम पे बढ़ रही हिंसा पे प्रधानमंत्री ने चुप्पी तोड़ते हुए अपना नजरिये साफ किया है...
"देश में गौरक्षा के नाम पे बढ़ रही हिंसा पे प्रधानमंत्री ने चुप्पी तोड़ते हुए अपना नजरिये साफ किया है. प्रधानमंत्री ने गौरक्षा के नाम पे हो रही हिंसा की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए कहा की ऐसे गौरक्षक ज्यादातर फ़र्ज़ी हैं और ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए. उन्होंने कहा की यदि गौरक्षा के नाम पे लोगों से मारपीट करने वाले इन लोगों का इतिहास निकाला जाए तो इनमें से अस्सी फीसदी लोग अवैध गतिविधियों में लिप्त मिलेंगे. \n\n ऐसे असामाजिक तत्वों पे निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा की उन्हें इस बात पे बहुत गुस्सा आता है की कुछ लोग गौरक्षा के नाम पे अपनी दुकान चला रहे,ऐसे लोग रात में अवैध कामों में लिप्त रहते हैं और दिन में गौरक्षा का ढोंग करते है. साथ ही उन्होंने इस मामले को पूरी तरह से केंद्र की जिम्मेदारी से हटाते हुए राज्य सरकारो से भी आग्रह किया की अगर ऐसे लोगों पे एक फाइल बनाई जाए तो उनमें से 70-80 फीसदी लोग ऐसे कामों में लिप्त पाए जाएंगे जो समाज के लिए गैरकानूनी होंगे पर वो गौरक्षा का मुखौटा लगा के खुद को बचाने की कोशिश कर रहें हैं. \n\n पीएम के इस बयान को आरएसएस का भी साथ मिला, आरएसएस के भैयाजी जोशी ने कहा की कुछ लोग गौरक्षा के नाम पे देश का माहौल ख़राब करने लगे हुए हैं, ऐसे लोगों की वजह से उन लोगों का भी नाम ख्रराब होता है जो गायों की वास्तविक सेवा कर रहे और निरक्षड़ दे रहे, उहोने लोगो से अपील की ऐसे लोगों का भंडाफोड़ करना चाहिए. \n\n हालाँकि प्रधानमंत्री का ये बयान अखिल भारतीय हिंदूसभा को बिलकुल भी रास नहीं आया, यही नही उन्होंने तो इसके लिए प्रधानमंत्री को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दे डाली। उन्होंने कहा की यदि प्रधानमंत्री ने गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध नहीं लगाया तो देश की जनता उन्हें अगले लोक सभा चुनवो में सबक सिखाएगी. \n\n"

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने कहा उपराज्यपाल ही हैं दिल्ली के प्रशासक

हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कहा की दिल्ली आगे भी एक यूनियन टेरिटरी ही रहेगी और उपराज्यपाल ही इसके प्रमुख प्रशासक होंगे
"हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कहा की दिल्ली आगे भी एक यूनियन टेरिटरी ही रहेगी और उपराज्यपाल ही इसके प्रमुख प्रशासक होंगे. हाईकोर्ट ने दिल्ली सर्कार की उस दलील को भी दरकिनार कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था की उपराज्यपाल को मंत्रियों के दिशा निर्देश पे ही काम करना चाहिए, हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 239AA का हवाला देते हुए कहा की दिल्ली एक यूनियन टेरिटरी है लिहाजा इसके प्रशासक उपराज्यपाल ही रहेंगे और दिल्ली सरकार उनकी अनुमति के बिना कोई कानून नहीं बना सकती है. \n\n अरविन्द केजरीवाल के सत्ता सँभालने के बाद से ही उनके और उपराज्यपाल में टकराव का माहौल रहा है, उनकी हमेशा से ये शिकायत रही है की उपराज्यपाल नजीब जंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें अपने हिसाब से काम नहीं करने दे रहे और उनके काम में अवरोध डाल रहे हैं. \n\n हालाँकि इस मामले में अभी आम आदमी पार्टी ने हर नहीं मानी है और अब वो हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा की वो हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं पर वो इस से सहमत नहीं हैं और वो इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. \n\n दिल्ली सरकार ने भारतीय संविधान के आर्टिकल 131 का हवाला देते हुए कहा की यदि किन्ही दो राज्यो या राज्य और केंद्र में कोई मतभेद होता है तो उसका निपटारा करने का हक़ सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है, हाईकोर्ट इसपे अंतिम फैसला नहीं दे सकती है. \n\n हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद केजरीवाल विरोधी सुर भी तेज हो गए हैं, उपराज्यपाल नजीब जंग ने मामले पे अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा की ये जीत हार किसी की नहीं ये भारतीय संविधान की जीत है.कभी केजरीवाल के पूर्व सहयोगी रहे योगेंद्र यादव ने ट्वीट किया, दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले का सबक है,आप शासन की व्याकरण को जाने बगैर शासन नहीं कर सकते, भारतीय जनता पार्टी के सांसद महेश गिरी ने दिल्ली की सड़कों पे पोस्टर लगा के केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की है. \n\n"

धमकियों और विरोध प्रदर्शन के बिच इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए राजनाथ सिंह

जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद की धमकियों और इस्लामाबाद में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बिच गृहमंत्री राजनाथ सिंह...
"जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद की धमकियों और इस्लामाबाद में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बिच गृहमंत्री राजनाथ सिंह सार्क सम्मेलन की मीटिंग में हिस्सा लेने इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए. 2 दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे राजनाथ सिंह गत वर्ष पठानकोट बेस पे हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाते हुए इस्लामाबाद से कहेंगे की वे भारत में आतंकवाद प्रायोजित करना बंद करे. \n\n दोनों देश के बिच बने तनाव के माहौल के बिच उनकी ये यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही, हालाँकि भारत सरकार ने ये स्पष्ट किआ है की गृहमंत्री सिर्फ सार्क सम्मलेन का हिस्सा बनेंगे इसके अत्तिरिक्त वो पाकिस्तान के किसी भी मंत्री से किसी और विषय में कोई और मुलाकात नहीं करेंगे.इस दौरे पे सार्क देशो के सामने राजनाथ सिंह आतंकवाद के मुद्दे को प्राथमिकता देंगे इसके साथ ही पाकिस्तानी एजेंसीयों द्वारा नकली भारतीय नोट छापी जाना, छोटे हथियारों की तस्करी का मुद्दा भी उठाएंगे. \n\n उनकी इस यात्रा से पूर्व मुम्बई हमलों के आरोपी हफ़ीज़ सईद ने गीदड़ धमकी देते हुए कहा की यदि राजनाथ इस्लामाबाद आते हैं, तो इस्लामाबाद के साथ साथ पुरे पाकिस्तान में कड़ा विरोध प्रदर्शन होगा। आतंकी बुरानी की मौत से बौखलाए हफ़ीज़ ने राजनाथ सिंह को कश्मीरियों का हत्यारा बताते हुए कहा की क्या 'पाकिस्तान सरकार कश्मीरी भाइयों की हत्या के ज़िम्मेदार राजनाथ सिंह का फूलों की माला से स्वागत करेगी'? \n\n मामले की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने गृहमंत्री को राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा देने का फैसला किआ है उनकी सुरक्षा में पाकिस्तान की एलीट फाॅर्स के जवानों के साथ 200 कमांडोज़ को भी तैनात किआ जाएगा. \n\n"

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने दिया इस्तीफा

गुजरात में होने वाले आम चुनावो से महज एक साल पहले गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है..
"गुजरात में होने वाले आम चुनावो से महज एक साल पहले गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. पार्टी में चल रहे भेदभाव और राज्य में चल रहे असंतोष की वजह से उन्होंने ये फैसला लिया। माना जा रहा है की अमित शाह के नेतृत्व वाला बीजेपी समूह आनंदीबेन पटेल के कामकाज से संतुष्ठ नहीं था और इस से पहले उनको हटाया जाए उन्होंने खुद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. \n\n हालाँकि उन्होंने अपने बयान में उम्र का हवाला देते हुए कहा की पार्टी का नियम है की 75 वर्ष की आयु के बाद आपको अपना पद छोड़ना पड़ता है और वो इस वर्ष नवंबर में 75 वर्ष की होने वाली हैं, पर इसकी मुख्य वजह पिछले कई दिनों से हार्दिक पटेल के नेतृत्व में चल रहा पटेल आंदोलन और हाल ही में शुरू हुए दलित आंदोलन को सँभालने में सरकार की नाकामी मानी जा रही है. \n\n गुजरात की प्रथम महिला मुख्यमंत्रीं आनंदीबेन पटेल ने कार्यभार पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संभाल था, महज दो वर्षो बाद अपने पद से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा की मैंने दो महीने पहले ही पार्टी से गुजारिश की थी की मुझे अपने पदों से मुक्त कर दिया जाए और अभी फिर इस पत्र के माध्यम से यही अनुरोध कर रही हूं, राज्य में अगले साल होने वाले चुनावो और जनवरी में होने वाले वाइब्रेंट गुजरात महोत्सव से पूर्व अगले होने वाले मुख्यमंत्री को थोड़ा समय मिल जाएगा. \n\n"

दलित गाली मायावती और भाजपा

राजनीति में इनदिनों गाली हर मसले पर भारी है. दलितों की रक्षा के लिए संसद में चल रही बहस इतनी आसानी से मायावती पर शिफ्ट हो जाएगी इसका अंदाज तो खुद बसपा प्रमुख को नहीं रहा होगा
"""राजनीति में इनदिनों गाली हर मसले पर भारी है. दलितों की रक्षा के लिए संसद में चल रही बहस इतनी आसानी से मायावती पर शिफ्ट हो जाएगी इसका अंदाज तो खुद बसपा प्रमुख को नहीं रहा होगा. कहां मसला था हिंदू गो रक्षकों द्वारा गुजरात में दलितों पर अत्याचार का और कहां वह पहुंच गया उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता द्वारा बसपा मुखिया को लेकर की गई बयानबाजी पर. उसके बाद तो उत्तर प्रदेश की सियासी माहौल गाली केंद्रित ही हो गया. \n\n हुआ यह कि भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप लगाते हुए कह दिया कि बसपा प्रमुख मायावती पार्टी का टिकट सुबह किसी और को, शाम को किसी और को और रात को किसी और को बेच देती हैं ऐसा तो वेश्या भी नहीं करती. भारतीय जनता पार्टी ने इस टिप्पणी को गलत माना और कार्रवाई करते हुए पहले सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से हटाया और बाद में पार्टी से भी छह साल के लिए निकाल दिया. \n\n यह मामला पहले तो संसद के दोनों सदनों में उठा. फिर पूरे यूपी में बसपा कार्यकर्ताओं और मायावती समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. यह पूरी तरह से प्रायोजित प्रदर्शन था जिसमें बसपा नेताओं के इशारे पर कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर सिंह की मां और बेटी के लिए अपशब्द बोलने शुरू कर दिए. \n\n मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने दयाशंकर को महिला के अपमान का अहसास कराने के लिए ही उनके परिवार को अपशब्द कहे. जिससे वो आगे कभी ऐसा शब्दों का प्रयोग ना करें. मायावती ने कहा कि अगर दयाशंकर की मां पत्नी और बेटी मीडिया में उनके बयान की निंदा करते तो उऩके खिलाफ कुछ नहीं होता. \n\n जवाब में दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह ने बसपा नेता से पूछा कि अगर बसपा के लोग मेरा कत्ल कर दें और कहें कि सबक सिखाने के लिए किया तो क्या मायावती तब भी उनका समर्थन करेंगी. स्वाति सिंह ने कहा उनके पति के बयान के लिए उनके परिवार को क्यों निशाना बनाया जा रहा है. आखिर, उनकी 12 साल की बेटी 80 साल की मां और उनकी क्या गलती है \n\n उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है और उन्हें सुरक्षा चाहिए. भाजपा ने भी देर से ही सही बेटी के सम्मान में बीजेपी मैदान में के नारे के साथ जवाबी आंदोलन शुरू किया. इस बीच दयाशंकर सिंह की मां की ओर से मायावती समेत बीएसपी के कई बड़े नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई है फिलहाल भाजपा बसपा दोनों आंदोलन में लगी हैं. सपा सरकार तमाशा देख रही है कांग्रेस मौन धरना के भरोसे है और देश को कई दशकों तक प्रधानमंत्री देने वाले राज्य में सियासी मर्यादा गालियों से तार-तार है. \n\n"""

उना कांड,मानसून सत्र में राज्यसभा स्थगित

पिछले सत्र के हंगामे में निरस्त होने के बाद सरकार को जीएसटी और अन्य बिल पास करवाने के लिए मानसून सत्र से खासी उम्मीदें थी पर...
"पिछले सत्र के हंगामे में निरस्त होने के बाद सरकार को जीएसटी और अन्य बिल पास करवाने के लिए मानसून सत्र से खासी उम्मीदें थी पर इस सत्र की शुरुआत को देखते हुए ये लगता नहीं की विपक्ष किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में है. और सरकार को घेरने के लिए उसको उना कांड के रूप में एक मुद्दा भी मिल गया है. \n\n दिन की शुरआत में ही हुए हंगामे की वजह से राज्यसभा पहले शुरुआती 10 मिनट और फिर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. 12 बजे जब कार्यवाही फिर चालू हुई तो साथ ही हंगामा फिर चालू हो गया जिससे राजयसभा फिर से स्थगित कर दी गई. \n\n गुजरात के उना में 11 जुलाई को दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया था जब एक मृत गाय की चमड़ी निकाल रहे कुछ दलितों को 9 लोगों ने डंडो और लोहे से पीटा। सारे अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है और इस मामले में 4 पुलिस वालों को भी ससपेंड कर दिया गया है. \n\n मामले को लेकर राजयसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा 'इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए वह कम है. पीएम मोदी ने विदेश से लौटते ही 12 जुलाई को मुझसे बात की थी और घटना की जानकारी ली थी. वह इससे बहुत आहत थे.' \n\n"

बीजेपी को झटका ,नवजोत सिंह सिद्धू का राज्य सभा से इस्तीफा

आने वाले मानसून सत्र की तैयारिओं में जुटी भारतीय जनता पार्टी को तब करारा झटका लगा जब राज्य सभा के सदस्य पूर्व क्रिकेटर ...
"आने वाले मानसून सत्र की तैयारिओं में जुटी भारतीय जनता पार्टी को तब करारा झटका लगा जब राज्य सभा के सदस्य पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया साथ ही उनकी पत्नी नवजोत कौर ने भी बीजेपी के पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्य सभा में बीजेपी वैसे भी बहुमत में नहीं है और एक और सदस्य खोने से इस सत्र में राज्य सभा से जीएसटी बिल पास कराने की उम्मीद भी कम हो गई है. \n\n कयास लगाए जा रहे हैं की सिद्धू अब आम आदमी पार्टी में सम्मिलित हो सकते हैं, उनकी पत्नी ने ये साफ कर दिया है की राजयसभा से इस्तीफा का मतलब बीजेपी से इस्तीफा भी है, उधर आम आदमी पार्टी ने भी चंडीगढ़ में ये कहा है की सिद्धू की साफ छवि को देखते हुए अगर वो आप में आने का विचार करें तो पार्टी उनका स्वागत करेगी. \n\n ये अटकलें तब और तेज हो गयी जब अरविंद केजरीवाल ने सिद्धू के इस फैसले को सलाम करते हुए टवीट किया की 'क्या आपने कभी किसी को अपने राज्य को बचाने के लिए राज्यसभा से इस्तीफा देते देखा है? मैं सिद्धू जी को इस फैसले के लिए सलाम करता हूं' \n\n सिद्धू बीजेपी में पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों की वजह से नाखुश थे साथ ही राज्य में अपने पद से भी संतुस्ट नहीं थे , 2014 के चुनावों में उनको अपनी सीट भी अरुण जेटली के लिए छोड़नी पड़ी थी. अपने बयान में सिद्धू ने कहा 'सम्मानीय प्रधानमंत्री के कहने पर मैंने पंजाब के कल्याण के लिए राज्यसभा का मनोयन स्वीकार कर लिया था,पंजाब के लिए हर खिड़की बंद होने के साथ उद्देश्य धराशायी हो गया,अब यह महज बोझ रह गया,मैंने इसे नहीं ढोना सही समझा. \n\n"

पीएम मोदी के नए मंत्री, जानें कौन कहां से

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्री परिषद उन्नीस नए मंत्रियों को जगह दी है. एक मंत्री प्रकाश जावडेकर का प्रमोशन कर कैबिनेट मंत्री बना दिया....
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्री परिषद उन्नीस नए मंत्रियों को जगह दी है. एक मंत्री प्रकाश जावडेकर का प्रमोशन कर कैबिनेट मंत्री बना दिया. \n\n जानते हैं नए मंत्रियों की ब्रीफ प्रोफाइल: \n\n एमजे अकबर: मशहूर पत्रकार, भाजपा से राज्यसभा सांसद. टेलीग्राफ, एशियन ऐज के संपादक रह चुके हैं. 1989 में कांग्रेस के सांसद थे. 2014 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से जुड़े. \n\n पुरुषोत्तम रूपाला: प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात से, राज्यसभा सांसद. पेशे से शिक्षक. भाजपा व आरएसएस में गहरी पैठ. गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. \n\n एसएस अहलूवालिया: दार्जलिंग से लोकसभा सांसद, भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य. सिख समुदाय से, कई बोलियां फर्राटेदार बोलते हैं. \n\n रामदास अठावले: प्रमुख दलित नेता. आरपीआई के अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद. भाजपा उत्तरप्रदेश व पंजाब के दलित वोटरों को संदेश देना चाहती है. \n\n अर्जुन मेघवाल: बीकानेर से सांसद हैं. राजनीति विज्ञान में एमए, एलएलबी व एमबीए की पढ़ाई. लो-प्रोफाइल सांसद, साइकिल से संसद जाते हैं. \n\n अजय टमटा: उत्तराखंड से भाजपा सांसद. केंद्र में उत्तराखंड से भाजपा का चेहरा. उत्तराखंड के वोटरों को एक संदेश. \n\n महेंद्रनाथ पांडेय: उत्तर प्रदेश की चंदौली सीट से सांसद. पूर्वांचल का अहम ब्राह्मण चेहरा, जहां ब्राह्मण वोट किसी की जीत व हार तय कर सकते हैं. \n\n पीपी चौधरी: वरिष्ठ अधिवक्ता. राजस्थान से सांसद. सांसद रत्न अवार्ड. राजस्थान को महत्त्व देने की कोशिश. \n\n अनुप्रिया पटेल: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से सांसद. ओबीसी समुदाय से. अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की बेटी. मां कृष्णा पटेल से वर्चस्व की लड़ाई. \n\n फग्गन सिंह कुलस्ते: मध्यप्रदेश के प्रमुख आदिवासी नेता. वाजपेयी सरकार में केंद्र में जनजातीय मामलों के मंत्री रहे हैं. \n\n विजय गोयल: दिल्ली से. लंबे अरसे से दिल्ली की मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी. वाजपेयी सरकार में पीएमओ में राज्यमंत्री. \n\n अनिल माधव दावे: मध्यप्रदेश से. राज्यसभा सांसद. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गहरी छाप. आरएसएस के प्रतिनिधि. \n\n सुभाष भामड़े:महाराष्ट्र की धुले सीट से लोकसभा सांसद. कैंसर विशेषज्ञ. मुफ्त में स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए मशहूर. \n\n रमेश चंद्रप्पा जिगजिनागी: कर्नाटक के बीजापुर से लोकसभा सांसद. दलित समुदाय से. रामकृष्ण हेंगड़े उनके राजनीतिक संरक्षक थे. \n\n राजेन गोहेन:: असम के नागांव से लोकसभा सांसद. गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से बीए व एलएलबी. \n\n सीआर चौधरी: राजस्थान के नागौर से लोकसभा सांसद. पूरा नाम छोटू राम चौधरी. राजस्थान लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं. \n\n पीपी चौधरी: राजस्थान के पाली से लोकसभा सांसद. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील.\n\n जसवंत सिंह भभोर: गुजरात से. राज्य में आदिवासी मामलों व ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री रहे. \n\n मनसुख लक्ष्मणभाई मांडविया: गुजरात से. राज्यसभा सांसद. भावनगर जिले के रहने वाले. \n\n कृष्णा राज: उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर से लोकसभा सांसद दलित समुदाय से. \n\n "

अरेस्ट हुए केजरीवाल के प्रिंसिपल सेक्रेटरी

सीबीआई ने करीब दस साल पुराने एक मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार और चार दूसरे लोगों को अरेस्ट किया...
"सीबीआई ने करीब दस साल पुराने एक मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार और चार दूसरे लोगों को अरेस्ट किया, जिनमें मुख्यमंत्री कार्यालय के उपसचिव तरण शर्मा, संदीप कुमार, दिनेश गुप्ता और अशोक कुमार शामिल हैं. इन लोगों पर सीबीआई ने सरकारी ठेकों में घूस लेने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. \n\n सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ के मुताबिक कुछ दिन पहले ही सीबीआई ने राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापे मारे थे. राजेंद्र कुमार पर सरकारी कार्यालयों में स्टेशनरी, कम्प्यूटर और सॉफ्टरवेयर डेवलपमेंट के ठेके में गड़बड़ी करने और अपने खास लोगों को कॉन्ट्रैक्ट देने, दिलाने का आरोप है. सीबीआई का कहना है कि राजेंद्र कुमार ने इस तरह के काम में करीब 50 करोड़ रुपए की रिश्वत ली थी. \n\n सीबीआई का आरोप है कि राजेंद्र कुमार ने अलग-अलग महकमों की जिम्मेदारी संभालते हुए अपने लोगों के नाम पहले तो कंपनियां बनाईं और जब कॉन्ट्रैक्ट देने की बारी आई तो इन्हीं फर्जी कंपनियों को फायदा पहुंचाया. सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की एफआईआर में कहा गया है कि 2006 में एंडेवर्स सिस्टम्स नाम की कंपनी बनाई गई. यह राजेंद्र कुमार और अशोक कुमार की फ्रंट कंपनी है. दिनेश कुमार गुप्ता और संदीप कुमार इसके निदेशक थे. यह कंपनी सॉफ्टवेयर और सॉल्यूशन मुहैया कराती थी. \n\n 2007 में राजेंद्र कुमार ने दिल्ली सरकार की ओर से हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खरीद के लिए आईसीएसआईएल का एक पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू की. 2007 में जब राजेंद्र कुमार दिल्ली ट्रांसपोर्ट लिमिटेड के सचिव बनाए गए, तब बिना उचित टेंडर के वह ठेके बांटते रहे. यह कुल मिलाकर 50 करोड़ रुपए का घोटाला था. \n\n हालांकि दिल्ली सरकार ने सीबीआई की इस काररवाई को केंद्र सरकार की बदले की भावना करार दिया है. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार इतने निचले स्तर पर उतर आई है कि इसपर कोई बात कहना भी शर्मनाक है. यह दिल्ली सरकार को बदनाम करने की साजिश है. सच तो यह है कि दिल्ली सरकार के काम करने वाले अधिकारियों को एक एक करके हटाया जा रहा है. \n\n याद रहे कि पिछले साल 15 दिसंबर को सीबीआई ने मुख्यमंत्री कार्यालय के करीब राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर छापा मारा था, तब भी दिल्ली की 'आप' सरकार और केंद्र की 'बीजेपी' सरकार के बीच बहसबाजी का तीखा दौर चला था. राजेंद्र कुमार 1989 बैच के आईएएस अफसर हैं और अरविंद केजरीवाल की तरह ही आईआईटी के छात्र रह चुके हैं. \n\n"

जम्मू-कश्मीर की सियासत में फिर उफान

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा चल रही है. इस यात्रा की सुरक्षा पर भारत और जम्मू-कश्मीर सरकार की पूरी ताकत लगी हुई है...
जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा चल रही है. इस यात्रा की सुरक्षा पर भारत और जम्मू-कश्मीर सरकार की पूरी ताकत लगी हुई है. सरकार, पुलिस, फौज और आतंकवादी सभी ने यह वादा किया था कि यह यात्रा शांति से संपूर्ण होगी. पर अब हिजबुल मुजाहिदीन के स्थानीय कमांडर बुरहान वानी के अनंतनाग में हुए एक एनकाउंटर के दौरान मारे जाने के बाद हालात बदलते से लग रहे. \n\n बुरहान वानी मोस्ट वांटेड टेरेरिस्ट में से एक था. उसके सिर पर 10 लाख का ईनाम था और उसे हिजबुल का पोस्टर ब्वॉय माना जाता था. बुरहान ने कुछ दिन पहले व्हाट्सएप पर कुछ साथियों का एक वीडियो शेयर किया था. वह हिजबुल में नए लड़कों की रिक्रूटमेंट करता था. \n\n कश्मीर में पिछले 24 साल के दौरान बुरहानी हिजबुल का पहला कमांडर था, जिसने अपनी और अपने साथियों की हथियार लिए हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगाई थी. हाल ही में 6 मिनट 17 सेकंड के एक वीडियों को बानी ने सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अपलोड़ किया था, जिसमें टेररिस्टों से कहा था कि वे अमरनाथ यात्रा करने वालों पर हमला न करें. \n\n हालांकि, बानी ने वीडियो में कहा था कि वह कश्मीर की आजादी के लिए चलाए जा रहे मूवमेंट का सपोर्ट करता है. उसने कश्मीर पुलिस से कहा था कि वे जिहाद के खिलाफ कार्रवाई बंद करें, क्योंकि वह कश्मीर का ही हिस्सा हैं, लेकिन वह हिंदोस्तान की नीतियों को नहीं समझते हैं. उसने घाटी में बनाई जा रही सैनिक कॉलोनी और कश्मीरी पंडितों के लिए अलग से बनाई जा रही कॉलोनी पर हमले की वकालत भी की थी. \n\n कश्मीर के त्राल का रहने वाला बुरहान बानी एक रसूखदार फैमिली से था, उसके पिता घाटी में एक स्कूल के प्रिंसिपल थे. महज 15 साल की उम्र में ही 2010 में अपने भाई के मारे जाने के बाद बुरहान हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ गया था. \n\n पिछले महीने अनंतनाग जिले में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद उसकी अंतिम वीडियो सोशल मीडिया पर देखा गया था. जिसमें वह ऐसे और हमलों को अंजाम देने की धमकी देता हुआ दिख रहा था. पुलिस और सेना ने कोकेर्नाग के बुमडूरा गांव में उसके खिलाफ संयुक्त अभियान में चलाया. यह मुठभेड़ काफी लंबे समय तक चली। \n\n वाणी की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर के सीएम रहे उमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट कर कहा कि इससे घाटी में आने वाले दिन टेंशन भरे रहेंगे. उमर ने यह भी कहा कि उन्होंने सीएम रहते कभी बुरहान के सोशल मीडिया की किसी पोस्ट को टेररिज्म से जुड़ा नहीं पाया. \n\n

अब जाकिर नाईक पर बवेला

ढाका में आतंकी हमला हुआ. हमलावरों ने दर्जनों लोगों को पकड़ा ,कुरान की आयतें सुनाने को कहा ,और जो नहीं सुना पाए ,उनका गला रेत कर मार दिया...
ढाका में आतंकी हमला हुआ. हमलावरों ने दर्जनों लोगों को पकड़ा, कुरान की आयतें सुनाने को कहा, और जो नहीं सुना पाए, उनका गला रेत कर मार दिया. इनमें एक हिंदुस्तानी लड़की भी थी. कहा जाता है कि ये आतंकवादी एक भारतीय मुस्लिम धर्मगुरु डॉक्टर जाकिर नाईक के समर्थक थे. आखिर जाकिर नाईक है कौन? \n\n जाकिर नाईक का जन्म मुंबई के डोंगरी इलाके में 18 अक्तूबर 1965 में हुआ. उन्होंने मुंबई के टोपीवाला नेशनल मेडिकल कालेज से एमबीबीएस डिग्री ली और इसी इलाके में दवा की दुकान खोल ली. लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने साल 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन नामक एक संस्थान बनाया. \n\n मुंबई के जिस डोंगरी इलाके में उनका फाउंडेशन चलता है, वह इलाका अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का माना जाता है. दक्षिण-मध्य मुंबई के डोंगरी में दाऊद के अलावा हाजी मस्तान, करीम लाला, छोटा शकील, अरुण गवली और रमा नाईक जैसे अंडरवर्ल्ड डॉनों का दबदबा रहा है. \n\n जाकिर अपने इस फाउंडेशन के जरिए जहां इस्लामिक धर्म का प्रचार करते हैं वहीं उनके इस फाउंडेशन के लिए दुनियाभर से डोनेशन भी आते हैं. डोनेशन की राशि फाउंडेशन के नाम से डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक में खुले खाते में जमा होती है. यह फाउंडेशन गरीब मुस्लिम छात्रों को स्कॉलरशिप देता है और नौकरियां भी दिलाता है. \n\n जाकिर इस्लाम पर भाषण देने के साथ कुरान की प्रति भी बांटते हैं. बाद में पीस टीवी से उनका करार हुआ जहां उनकी तकरीर होती है. वह अंग्रेजी में तकरीर देते हैं. पीस टीवी बांग्ला और उर्दू में भी शुरू किया है. साल 2010 से लंदन और कनाडा में उनके प्रवेश पर पाबंदी है. \n\n उन्होंने मुंबई के सोमैया ग्राउंड में भी दस दिनों का पीस कांफ्रेंस किया था, जिसमें दुनियाभर के इस्लामिक धर्म गुरुओं ने भाषण किया था. कहते हैं कि जाकिर अलकायदा के आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के विचारों का समर्थन करते हैं. अपने भाषण देते समय जाकिर धार्मिक गुरू की पारंपरिक पोशाक न पहनकर टाई और सूट पहने रहते हैं. \n\n जाकिर से ढाका के आतंकी हमले के दो आतंकी ही प्रभावित नहीं हैं, बल्कि मुंबई के मालवणी के रहने वाले आईएस मॉड्यूल अयाज सुल्तान और हैदराबाद के आईएस प्रमुख इब्राहिम यजदानी भी जाकिर से प्रभावित हैं. मुंबई लोकल बम धमाके का आरोपी राहिल शेख भी जाकिर से प्रभावित था. इब्राहिम ने तो जांच एजंसी एनआईए को पूछताछ में खुलासा भी किया था कि वह साल 2010 में जाकिर के कैंप में 10 दिनों तक बतौर कार्यकर्ता काम किया था. \n\n

अगर प्रियंका गांधी राजनीति में आईं तो

कांग्रेस को मजबूत करने के लिए लंबे समय से प्रियंका गांधी की सक्रिय भागीदारी चाहने वालों के लिए संकेत यही हैं ....
कांग्रेस को मजबूत करने के लिए लंबे समय से प्रियंका गांधी की सक्रिय भागीदारी चाहने वालों के लिए संकेत यही हैं कि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में प्रियंका की भूमिका थोड़ी बड़ी जरूर हो सकती है, पर पार्टी की कमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हाथों में ही रहेगी. \n\n कांग्रेस आलाकमान प्रियंका की भूमिका को लेकर बहुत सावधानी से अपने कदम आगे बढ़ा रहा है. हालांकि बड़ी संख्या में कांग्रेसी प्रियंका को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में लाने की वकालत कर रहे थे, पर कांग्रेस नेतृत्व इसके लिए तैयार नहीं हुआ, हां इतना जरूर है कि प्रियंका की चुनावी रैलियों की गिनती जरूर काफी बढ़ा दी गई है. \n\n प्रियंका की भूमिका बढ़ाने का एक मकसद यह भी है कि इससे राहुल गांधी को सहयोग मिल सकेगा. लखनऊ तथा इलाहाबाद शहरों को कांग्रेस अपने मेन बेस के रूप में चुनेगी. एआईसीसी को उत्तर प्रदेश में नई प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन भी करना है, ऐसे में कांग्रेस को अगर जिंदा रखना है, तो उसे उत्तर प्रदेश में कोई ताकतवर चेहरा लाना ही होगा. \n\n कांग्रेसियों के मुताबिक प्रियंका से बेहतर कोई हो नहीं सकता. नेहरू-गांधी परिवार के करीबी लोग बताते हैं कि अगर इंदिरा गांधी का रुआब उनके परिवार में किसी को विरासत में मिला है तो वह प्रियंका गांधी ही हैं. कहते हैं रायबरेली-अमेठी में अपने दौरों के दौरान प्रियंका जबतब अपनी दादी इंदिरा गांधी की साड़ी भी पहन कर निकल जातीं हैं. \n\n पिछले काफी सालों से प्रियंका गांधी-वाड्रा ही अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्रों अमेठी और रायबरेली में कैम्पेन भी करती रही हैं और वहां के लोगों के सीधे संपर्क में भी हैं. वहां के लोग भी यही मानते हैं कि वे बनावटी नहीं हैं और सबसे दिल से मिलती हैं. अपनेपन का ये रिश्ता उनमें साफ दिखता है. रहा सवाल सीधे राजनीति में घुसने के फ़ैसले का, तो ये तो उनका और उनके परिवार का ही फ़ैसला होगा. \n\n इसमें कोई दो राय भी नहीं है कि पब्लिकली प्रियंका गांधी ने हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने में एक हिचक सी दिखाई है.पर उन्हें जो भी करना होगा, जल्दी करना होगा. यह ठीक है कि प्रियंका गांधी का अंदाज़ है, सभी के साथ मिल-बैठ कर बात करना और सभी को याद रखना. उनका करिश्मा उन क्षेत्रों में तो दिखता है, जहां वे कैम्पेन करतीं हैं, खासतौर से लोकसभा चुनाव में. लेकिन इन्हीं इलाकों में पिछले विधानसभा चुनावों में उनका कोई खास असर नहीं दिखा, जबकि प्रियंका ने खुद इसके लिए टारगेट सेट किए थे. \n\n

आतंकी की मौत पे पाकिस्तान ने बहाए आंसू ,भारत की निंदा की

हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के एनकाउंटर से पाकिस्तान को खासा सदमा पहुंचा है....
"हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के एनकाउंटर से पाकिस्तान को खासा सदमा पहुंचा है,पाकिस्तान सरकार के द्वारा दिए गए बयान के मुताबिक पाकिस्तान ने बुरहान वानी को कश्मीर का नेता बताया है और कहा की पाकिस्तान को इस घटना से काफी धक्का लगा है साथ ही इस घटना से उठे विद्रोह में गयी कश्मीरियों की जान के लिए भी भारत सरकार की सख्ती को जिम्मेदार बताया, इस घटना के बाद हुए हिंसक विरोधों में अबतक 23 लोगों की जानें जा चुकी है और 1 पुलिसकर्मी की भी मौत हो चुकी है. \n\n घाटी में बनी तनावपूर्ण स्थिति के मद्देनज़र अमरनाथ यात्रा को भी स्थगित कर दिया गया है, श्रीनगर में कर्फ्यू का माहौल बना हुआ है और सार्वजानिक यातायात की सारी सुविधाएं स्थायी रूप से बंद है , कई संवेदनशील जगहों पे मोबाइल सर्विसेज भी बंद कर दी गयी हैं। मामले को काबू में करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षबल घाटी में भेजा जा रहा है. \n\n मामले पे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू कश्मीर की मुख्य्मंत्री से बात की और केंद्र सरकार की तरफ से स्थिति काबू करने के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है और अमरनाथ यात्रा पे गए सारे श्रद्धलुओं को सुरक्षित जगह पे पहुँचाने की बात की है. \n\n"

अफ्रीका में मोदी

प्रधानमंत्री 4 अफ़्रीकी देशों के दौरे पे रवाना हो चुके हैं. उनकी यात्रा का पहला पड़ाव मोजांबिक रहा...
"प्रधानमंत्री 4 अफ़्रीकी देशों के दौरे पे रवाना हो चुके हैं. उनकी यात्रा का पहला पड़ाव मोजांबिक रहा, मोजांबिक में उन्होंने कुल 3 समझौते किये इसमें दाल आयात का समझौता मुख्य रहा भारत में दाल के पैदावार में गिरावट और दाल की कीमतों के आसमान छूते भाव के मद्देनज़र भारत ने 1 लाख टन अरहर दाल आयात करने का समझौता किआ है. \n\n यात्रा के अगले पड़ाव में प्रधानमंत्री दक्षिण अफ्रीका जाएंगे जहां राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे , इसके साथ वे 4 अफ़्रीकी शहरों का दौरा करेंगे और जोहांसबर्ग में भारतीयों को सम्बोधित करेंगे इसके बाद प्रधानमंत्री केन्या और तंजानिया के दौरे पे भी जाएंगे , इंदिरा गांधी के बाद ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला केन्याई दौरा होगा. \n\n मोजांबिक में भारतीय लोगों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा की ""अफ्रीका ही वह धरती है जिसने अप्रवासी भारतीयों की पहचान गढ़नी शुरू की"", मोजांबिक में कुल 20000 भारतीय रहते हैं जिनके लिए प्रधानमंत्री ने कहा ""आप सभी ने भले स्थानीय समाज और सभ्यता को अपना लिया, लेकिन इसके बावजूद आपने भारतीयपन को भी खुद में बचाए रखा है , अफ्रीका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने भारत की वैश्विक पहचान स्थापित करने में अपना योगदान दिया"" \n\n प्रधानमंत्री का ये दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा इससे न सिर्फ आपसी सहयोग बढ़ाया जाएगा बल्कि कूटनीति तौर पे भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है , चीन के अफ्रीका के बाजार में बढ़ते व्यापर और दाऊद इब्राहिम के हीरों के कारोबार पे भी रोक लगाने पर भी चर्चा की जा सकती है. \n\n"

बिहार में योग के नाम पर सियासत नहीं

बिहार कई मामलों में देश भर से अपनी अलग राय रखता है. शायद इसकी वजह उसका शानदार सांस्कृतिक इतिहास है ,...
बिहार कई मामलों में देश भर से अपनी अलग राय रखता है. शायद इसकी वजह उसका शानदार सांस्कृतिक इतिहास है, जो पाटलीपुत्र से बोधगया तक समान रूप से फैला हुआ है. यही वजह थी कि जून के दूसरे पखवारे में जब समूची दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही थी और बिहार से जुड़े कई केंद्रीय मंत्री राज्य में कई जगहों पर जनता के साथ मिलकर योगासन और प्राणायाम के गुर सीख और सिखा रहे थे, तब नीतीश सरकार के मंत्रियों ने अपने को 'योग दिवस' के आयोजन से दूर रखा. \n\n बिहार सरकार ने विश्व योग दिवस पर ना तो कोई कार्यक्रम आयोजित किया और न ही बिहार सरकार का कोई मंत्री या विधायक योग के किसी कार्यक्रम में शामिल हुआ. जबकि आयोजन समिति के सदस्यों ने खुद जाकर सीएम, डिप्टी सीएम से लेकर सरकार के अधिकतर मंत्री और जदयू-राजद के नेताओं को निमंत्रित किया था, लेकिन भाजपा नेताओं को छोड़कर बिहार भर में हुए योग के किसी कार्यक्रम में सरकार के कोई भी नुमाइंदा शामिल नहीं हुआ. रविशंकर प्रसाद , गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव उन केंद्रीय मंत्रियों में रहे, जिन्होंने राज्यभर में अलग-अलग जगहों पर योग शिविर की अगुवाई की. आरोप लगा कि बिहार सरकार वर्ल्ड म्यूजिक डे मना रही है, योग दिवस नहीं. \n\n केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कहा कि अगर बिहार के मुख्यमंत्री और मंत्री भी योग कार्यक्रम में हिस्सा लेते तो अच्छा लगता और साथ ही पूरे देश में एक अच्छा संदेश भी जाता. हालांकि, रविशंकर प्रसाद ने योग पर राजनीति नहीं करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि योग राजनीति और सत्ता या विपक्ष से ऊपर है. इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. \n\n रविशंकर प्रसाद ने इस मौके पर योगा से संबंधित 370 रुपए का डाक टिकट भी खरीदा. प्रसाद ने यह भी कहा कि तंदुरूस्त रहने की इस प्राचीन पद्धति को बड़े पैमाने पर आयोजित करने से लोगों के बीच एकता को बढ़ावा मिलता है. उन्होंने योग को वैश्विक कार्यक्रम बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ भी की. केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मंझौले उपक्रम राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार इस आधार पर योग का विरोध कर रहे हैं कि यह बीजेपी और केंद्र की एनडीए सरकार का एक प्रचार अभियान है. उन्होंने ताना मारा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नीतीश कुमार की नाराजगी समझ सकता हूं, लेकिन योग से नहीं. चाहे सियासी वजह रही हो या रमजान का महीना, पर सच तो यह है कि राज्य के मुस्लिम समुदाय ने भी इस दिवस पर अपनी शिरकत नहीं की.

दिल्ली राज्य, पूरा या आधा, अगर वोटिंग हो तो

ब्रिटेन के यूरोपीयन युनियन में 'बने रहने या नहीं बने रहने' का फैसला वोटिंग के जरीए होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री...
ब्रिटेन के यूरोपीयन युनियन में 'बने रहने या नहीं बने रहने' का फैसला वोटिंग के जरीए होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने उत्साहित होकर दिल्ली को भी पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए जनमत संग्रह की बात क्या कह दी, लगता है बर्रै के छत्ते में हाथ डाल दिया. इसी के साथ उनके विरोधियों ने उनके नाम एक और विवाद जड़ दिया. कुछ ने तो यहां तक पूछ लिया कि कहीं केजरीवाल जी को ब्रिटेन का नशा तो नहीं चढ़ गया. \n\n मजे की बात तो यह है कि इस मसले पर एक दूसरे के धूर राजनीतिक विरोधी दल साथ मिलकर केजरीवाल के खिलाफ मोरचा खोले हुए हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल केजरीवाल पर भारतीय संविधान के खिलाफ बयान देने और कानून नहीं मानने का आरोप मढ़ रहे हैं. अरविन्द केजरीवाल ने ब्रिटेन में जनमत संग्रह के बाद कहा था कि जल्द ही दिल्ली में भी पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करने के लिए जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए. \n\n केजरीवाल के इस ऐलान के बाद ही केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि लगता है अरविन्द केजरीवाल को ब्रिटेन का नशा चढ़ गया है. कांग्रेस ने भी जनमत संग्रह की मांग को संविधान विरोधी बताते हुए कहा कि केजरीवाल अपनी सरकार की नाकामी से ध्यान हटाने के लिए रोज़ नए-नए बहाने खोज लेते हैं. \n\n इस बीच, केंद्र सरकार ने आज जनलोकपाल बिल समेत केजरीवाल सरकार के भेजे 14 बिल वापस कर दिए हैं. पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने की वजह से दिल्ली में कोई भी विधेयक पारित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी लेनी पड़ती है. दिल्ली पुलिस भी दिल्ली सरकार के नियंत्रण में नहीं है. \n\n इन आधे-अधूरे अधिकारों की वजह से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल बार-बार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठाते रहते हैं. हालांकि इसके लिए उन्होंने ब्रिटेन की तर्ज पर मतदान के जरीये फैसला करने का जो रास्ता बताया है, उसका भारतीय संविधान में कोई इंतज़ाम नहीं है. बीजेपी नेता और गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने चेतावनी के अंदाज में कहा है कि अगर केजरीवाल संविधान के दायरे से बाहर गए तो केंद्र को दखल देना पड़ेगा. याद रहे कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस पर भारी जीत हासिल की थी और अभी भी पार्टी की लोकप्रियता में कोई खास गिरावट नहीं आई है. \n\n

लौट रहे सुरेश सोनी

आरएसएस के संयुक्त महासचिव यानी सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का नाम तो आप सबने सुना ही होगा...
आरएसएस के संयुक्त महासचिव यानी सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का नाम तो आप सबने सुना ही होगा. वह करीब एक दशक तक बीजेपी और आरएसएस के बीच समन्वय की भूमिका निभाते रहे हैं, मगर केंद्र में अपने बूते बीजेपी की सरकार आने के कुछ समय बाद अक्तूबर 2014 में उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया था. पर पिछले एक साल से पढ़ाई-लिखाई के लिए छुट्टी ले कर चले गए. \n\n अब जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारकों की बैठक 12 से 15 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के कानपुर में हो रही है, तो उसमें सुरेश सोनी के भी शामिल होने की चर्चा है. आरएसएस के प्रांत प्रचारकों की यह सालाना बैठक हर साल अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद जुलाई में होती है. इस बैठक में देश भर के प्रांत प्रचारक हिस्सा लेते हैं. इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी हिस्सा ले सकते हैं. \n\n यूपी चुनाव बीजेपी के लिए बेहद खास हैं. आरएसएस इसमें पार्टी को पूरा सहयोग कर रहा है. आरएसएस के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबोले की लखनऊ में तैनाती इसी मक़सद से की गई है ताकि संगठन को चाक-चौबंद किया जा सके. प्रांत प्रचारकों की बैठक में इस बारे में भी चर्चा हो सकती है. \n\n अभी यह ज़िम्मेदारी कृष्ण गोपाल निभा रहे हैं. यह एक बेहद अहम ज़िम्मेदारी है क्योंकि सरकार और पार्टी की नीतियों और निर्णयों पर संघ के साथ विचार-विमर्श के लिए यह बीच की कड़ी है. हालांकि संघ ने पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए कृष्ण गोपाल के साथ संघ महासचिव भैय्याजी जोशी और दत्तात्रेय होसबोले को भी यह काम सौंपा है. \n\n संघ के भीतर ही सोनी को कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी. यह संभावना नहीं है कि बीजेपी के साथ समन्वय की ज़िम्मेदारी उन्हें फिर से सौंपी जाए. इसकी सबसे बड़ी वजह उन पर लगे आरोप हैं. याद रहे कि कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार पर व्यापम घोटाले में आरएसएस के नेताओं के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था और इसमें सुरेश सोनी का नाम भी लिया था. हालांकि एमपी सरकार ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था, पर सोनी के अवकाश को उसी से जोड़ कर देखा गया. \n\n कहते हैं कि सोनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद क़रीबी हैं. उनकी वापसी से आरएसएस के भीतरी समीकरणों पर भी असर पड़ेगा. जाहिर है बीजेपी पर भी इसका असर पड़ेगा. देखना यह है कि संघ और सोनी खुद के लिए क्या तय करते हैं\n\n

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