Masala Diary

पर्यटन मंत्री ने कहा विदेशी महिलाएं भारत में ना पहनें 'स्कर्ट'

केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने ये कह के एक नये विवाद को हवा दे दी है की विदेशी महिलाओं को भारत में स्कर्ट नहीं पहनना चाहिए...
"केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने ये कह के एक नये विवाद को हवा दे दी है की विदेशी महिलाओं को भारत में स्कर्ट नहीं पहनना चाहिए. उन्होंने कहा की भारत आने पे विदेशी महिलाओं को एक 'डु एंड डोंट' कार्ड देना चाहिए जिसपर यह स्पस्ट रूप से लिखा गया हो की स्कर्ट पहनकर बाहर ना जाएं और रात में अकेले ना घूमें. \n\n विदेशी यात्रिओं के लिए लांच किए गए हेल्पलाइन नंबर 1363 के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा की भारत आने वाली विदेशी महिलाओं को एक कार्ड देना चाहिए जिसपर यह लिखा हो की भारत में आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं, अगर वो छोटे शहरों में घूम रही हैं तो रात में अकेले बाहर न निकले और और स्कर्ट पहन के बाहर न जाएं, टैक्सी बुक करने से पहले नंबर प्लेट का फोटो खींच के अपने दोस्तों और परचितों को भेज दे. \n\n इस बयान की सोशल मीडिया पे खूब किरकिरी हुई और लोगों ने एक सिरे से इसकी निंदा की, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा की महिलाओं को वस्त्र पहनने की आज़ादी मोदी राज से ज्यादा वेदिक काल में थी. \n\n विवाद बढ़ता देख महेश शर्मा ने कहा की उनका ये बयान विदेशी पर्यटकों के लिए उनकी चिंता को दर्शाता है, उनका इरादा भारत में एक 'ड्रेस कोड' तैयार करने का नही है. उन्होंने कहा की उनकी खुद दो बेटियां हैं, और वो कभी किसी महिला को ये नहीं कह सकते की उसे क्या कपड़े पहनने चाहिए. \n\n"

बलूचिस्तान मामले में पाकिस्तान की तरफ से हस्तछेप कर सकता है चीन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत ने तमाम देशों से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है पर पड़ोसी चीन से उसके रिश्तों में...
"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत ने तमाम देशों से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है पर पड़ोसी चीन से उसके रिश्तों में सुधार होने के बदले और बिगड़ते जा रहे हैं, पहले चीन ने भारत का एनएसजी में आने का रास्ता रोका फिर भारत ने चीनी पत्रकारों को वीजा देने से मना कर दिया अब प्रधानमंत्री द्वारा बलूचिस्तान को लेकर दिया भाषण चीन को हजम नहीं हो रहा, चीनी थिंक टैंक ने कहा की अगर भारत बलूचिस्तान के मसले में हस्तछेप करता है तो चीन को भी इस मामले में दखल देना पड़ेगा. इसका सबसे बड़ा कारण है चीन का बलूचिस्तान में बड़ा निवेश। चीनी थिंक टैंक ने कहा की अगर भारत के किसी षडयंत्र से चीन की 46 लाख डॉलर की परियोजना में दखल पड़ता है तो चीन इस मामले में जरूर दखल देगा. \n\n प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पे दिए गए भाषण में बलूचिस्तान के लोगों को धन्यवाद किया था उन्होंने अपने भाषण में कहा की पिछले कुछ दिनों से जो बलूचिस्तान, गिलगित और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने जिस तरह से उनके लिए आभार प्रकट किया है, वो लोग जिन्हें उन्होंने कभी देखा नहीं कभी मिले नहीं उनके द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री के लिए इतनी इज्जत ये सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि 125 करोड़ लोगों के लिए गर्व की बात है. उन्होंने ये भी कहा की पाकिस्तान अपने देश के लोगों पे फाइटर प्लेन से हमला करता है उसे बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रही ज्यादतियों का जवाब देना पड़ेगा. \n\n प्रधानमंत्री के इन बयानों से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया था, पाकिस्तान ने कहा था की प्रधानमंत्री ने आज 'रेड लाइन' को लाँघ दिया है और पाकिस्तान अब यूएन के सामने कश्मीर का मुद्दा जरूर उठाएगा. \n\n पाकिस्तान पहले से ही बलूचिस्तान में अशांति के लिए भारत पे आरोप लगाता है हालांकि भारत ने अभी तक हमेशा ऐसे आरोपों को ख़ारिज किया है और भारत पाकिस्तान पे कश्मीर में अशांति फ़ैलाने का आरोप लगाता है, भारत का खुले में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाना पाकिस्तान को उसी की भासा में जवाब की देखा जा रहा जिस हिसाब से पाकिस्तान लगातार कश्मीर के मुद्दे को उछाल रहा. \n\n अब इस मामले में चीन के भी उतरने के आसार प्रबल हो गए हैं क्यूंकि उसने विवादित बलूचिस्तान छेत्र में बहुत बड़ा निवेश किया है, इस निवेश का भारत ने हमेशा विरोध किया है क्यूंकि उसे लगता है की ये प्रोजेक्ट उसके जमीन से हो के जाएगा. \n\n"

जम्मू कश्मीर में शांति बहाल करने पहुंचे राजनाथ सिंह

कश्मीर के बिगड़ते हालात पे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के चिंता जाहिर करने के बाद गृहमंत्री इस महीने में दूसरी बार जम्मू और कश्मीर के दौरे पे गए है..
"कश्मीर के बिगड़ते हालात पे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के चिंता जाहिर करने के बाद गृहमंत्री इस महीने में दूसरी बार जम्मू और कश्मीर के दौरे पे गए है. गृहमंत्री इस यात्रा पे वहां की स्थिति का जायजा लेंगे और सभी दलों से बात करके मामले का समाधान निकालेंगे. हालाँकि उन्होंने अलगावादियों को बातचीत करने का न्योता तो नहीं दिया है पर ये साफ किया है की अपनी यात्रा के दौरान वो किसी भी पक्ष से बातचीत करने के लिए तैयार हैं. \n\n गृहमंत्री के मंत्रालय से जारी किये गए बयान में कहा गया है की हमने अलगावादियों को कोई विशेष न्योता नहीं दिया है पर अगर वो गृहमंत्री से बात करने के इछुक हैं तो उनके इस फैसले का स्वागत किया जाएगा और भारतीय संविधान के अंतर्गत उनसे बातचीत की जाएगी. गृहमंत्री नेहरू गेस्ट हाउस में रुकेंगे और वहां कोई भी आके उनसे बात कर सकता है.\n\n कश्मीर दौरे पे पहुंचे सिंह जम्मू कश्मीर राज्य सरकार ने कोई उत्साह नहीं दिखाया,कश्मीर की मुख्यमंत्री उनका स्वागत करने भी नहीं पहुंची. केंद्र सरकार भी मामले पे राज्य सरकार के ढीले रवैये से खुस नहीं है और वो इस समस्या को जल्द सुलझाना चाहती है इसके लिए हो सकता है की वो इस मामले की कमान आने हाथों में ले. \n\n हालाँकि राजनाथ सिंह के दौरे के बीच भी कश्मीर में हिंसा काम होने का नाम नहीं ले रही ताजे वाकये में एक और इंसान की मौत ही गयी जबकि 60 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. \n\n आतंकी बुरहानी की मौत के बाद चालू हुए कश्मीर में अहिंसा के माहौल में अब तक 65 से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं. \n\n"

रंगून व गुजरात के सीएम रुपानी

एक समय गुजरात के नए सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे नितिन पटेल को पछाड़ने वाले विजय रुपानी ने गुजरात के सोलहवें मुख्यमंत्री ...
"एक समय गुजरात के नए सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे नितिन पटेल को पछाड़ने वाले विजय रुपानी ने गुजरात के सोलहवें मुख्यमंत्री के तौर पर जब गांधीनगर में शपथ ली तो राष्ट्रीय मीडिया को उनके बारे में कुछ खास पता नहीं था. दर असल रूपानी का सियासी सफर काफी रोचक रहा है. \n\n गुजरात विधानसभा के लिए पहली बार निर्वाचित हुए 60 साल के रुपानी जैन समुदाय से हैं, जिसे हाल ही में गुजरात सरकार ने अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है. गुजरात में राजनीतिक रुप से महत्त्वपूर्ण सौराष्ट्र क्षेत्र में खासी पकड रखने वाले रुपानी का जन्म साल 1956 में बर्मा, अब म्यामांर, के रंगून, अब यंगून में रमणीकलाल रुपानी के घर हुआ था, पर पालन पोषण राजकोट में हुआ. \n\n बीए और एलएलबी की डिग्री ले चुके रुपानी ने कालेज के दिनों से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी जब वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडे थे. 1970 के दशक में वह नवनिर्माण आंदोलन के समय छात्र संघर्ष समिति में शामिल हो गए. रुपानी उन शुरुआती लोगों में से हैं, जिन्होंने जय प्रकाश नारायण के कहने पर छात्र आंदोलन में भागीदारी की. आपातकाल के दौरान उन्होंने भुज और भावनगर जेलों में करीब एक साल बिताया. \n\n साल 1987 में वह पहली बार राजकोट के पार्षद चुने गए. इसके बाद उन्हें शहर की भाजपा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया. साल 1988 और 1996 के बीच वह राजकोट निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे और साल 1996-97 में महापौर बने. रुपानी को राजकोट का सौराष्ट्र क्षेत्र में औद्योगिक केंद्र के तौर पर विकास करने के लिए उनके अथक प्रयासों के चलते भी जाना जाता है. वह भाजपा की राज्य इकाई के चार बार महासचिव बनाए गए. \n\n रुपानी जब राज्य पर्यटन निगम के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने राज्य को पर्यटन डेस्टिनेशन बनाने के लिए ‘खुशबू गुजरात की' अभियान चलाया था. साल 2006 से 2012 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे और उस दौरान उन्हें जल संसाधन, खाद्य, लोक वितरण सहित अन्य संसदीय समितियों में चुना गया. \n\n साल 2013 में वह गुजरात म्यूनिसिपल फायनेंस बोर्ड के अध्यक्ष चुने गए. अक्तूबर 2014 में उन्होंने राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव जीता. विजय रुपानी 19 फरवरी को भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बने थे तब इसे पार्टी की राज्य इकाई में अमित शाह गुट की जीत के तौर पर देखा गया. \n\n"

सीएम का पद गया, दे दी जान

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल को इसी जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पद छोड़ना पड़ा था....
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल को इसी जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पद छोड़ना पड़ा था. अपनी कुर्सी जाने से कलिखो इतने सदमे में रहे होंगे इसका गुमान किसी को न था. हालांकि कलिखो काफी समय से लोगों से मिल नहीं रहे थे, पर वे अपनी जान दे देंगे यह सोच से परे था. जिस आवास में वह मुख्यमंत्री बन कर गए थे, उसी घर में पंखे से लटकता उनका शव पाया गया. 47 साल के कलिखो पुल ने सुसाइड कर लिया, यह उनके समर्थक अब भी मानने को तैयार नहीं. \n\n लकडी का सामान बनाने वाले कारपेंटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले पुल कभी गार्ड भी रहे थे. बीस जुलाई 1969 में अंजाव जिले के हवाई सर्किल के वाल्ला गांव में ताइलुम पुल और कोरानलु पुल के घर में कलिखो का जन्म हुआ. पुल ने लोहित जिले के तेजू के इंदिरा गांधी सरकारी कालेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की. उनकी राजनीतिक पारी 1995 में शुरू हुई जब वह हायुलियांग सीट से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद पुल ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा. वह लगातार पांच बार जीते और बिजली, वित्त, भूमि प्रबंधन जैसे विभाग संभाले. \n\n पुल को अरुणाचल प्रदेश के सबसे कम समय के मुख्यमंत्री के रुप में भी याद किया जाएगा. उन्होंने दो महीने के राजनीतिक संकट के बाद इस साल 19 फरवरी को राज्य की कमान अपने हाथ में ली थी, लेकिन पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने उनकी सत्तारुढ सरकार को अपदस्थ कर दिया और आदेश दिया था कि अरुणाचल में कांग्रेस की सरकार बहाल हो. दिसंबर 2015 तक कांग्रेस के साथ रहे पुल ने पार्टी से बगावत की और फरवरी में भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने. हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस नियुक्ति को अवैध करार दिया. बाद में नबाम तुकी को बहाल किया, जिसके बाद पेमा खांडू 10वें मुख्यमंत्री बने. \n\n पुल वित्त राज्यमंत्री (1995-97), बिजली राज्यमंत्री (1997-99), वित्त राज्यमंत्री (1999-2000), भूमि प्रबंधन राज्यमंत्री (2002-03) और फिर वित्त राज्यमंत्री (2003-05) रहे. वह एक उच्चशक्ति प्राप्त समिति के भी अध्यक्ष रहे तथा करीब एक साल मुख्यमंत्री के सलाहकार का जिम्मा भी संभाला. वर्ष 2006-09 में वह वित्त मंत्री, फिर ग्रामीण कार्य मंत्री (2009-11), और फिर स्वास्थ्य मंत्री रहे. 2011 से 2014 के बीच वह मुख्यमंत्री के सलाहकार भी रहे और 2014 में फिर से मंत्री बने. पुल की सामाजिक सेवा, सामुदायिक सेवा और गरीबों तथा वंचितों से मिलने में विशेष रुचि थी. \n\n

स्पीकर पर सवाल

हमारी सियासी व्यवस्था में संसद सर्वोच्च है. इससे ऊपर कोई नहीं ,क्योंकि राजनीति के जानकार जानते हैं कि संविधान और राष्ट्रपति भी संसद का ही एक हिस्सा हैं....
हमारी सियासी व्यवस्था में संसद सर्वोच्च है. इससे ऊपर कोई नहीं, क्योंकि राजनीति के जानकार जानते हैं कि संविधान और राष्ट्रपति भी संसद का ही एक हिस्सा हैं. ऐसे में अगर लोकसभा या राज्य सभा के प्रमुखों पर कोई सदस्य आरोप लगाता है तो अचरज होता है. पर हमारे आज के नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं. \n\n तभी तो आंध्र प्रदेश के मुद्दे पर लोकसभा में पिछले सप्ताह भर से जारी हंगामे और नारेबाजी के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने स्पीकर से नाराज हो कर कहा कि यह क्या तरीका है? इस प्रकार हंगामे के बीच कैसे सदन चलाया जा रहा है, तब स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उनके आरोपों का सख्ती से खंडन करते हुए कहा कि कोई भी बात होती है, तो सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाकर विचार-विमर्श किया जाता है. सदन सदस्यों और बहस के लिए ही तो है. \n\n हुआ दरअसल यह कि वाईएसआर कांग्रेस के सदस्यों द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर जब आसन के समक्ष नारेबाजी की जा रही थी, तो सपा मुखिया मुलायम सिंह अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए और आसन से कहा कि कभी हम लोगों को भी बोलने का मौका दें. इस पर जब अध्यक्ष ने उनकी बात को हंसी में उड़ाने की कोशिश की तो मुलायम सिंह नाराज हो गए. \n\n मुलायम फिर रुके नहीं. उन्होंने कहा, ‘आप हंसी में हमारी बात को टाल रही हैं. लोकतंत्र बातचीत से चलता है. बड़े-बड़े स्पीकर देखे हैं हमने.' उन्होंने सदन संचालन के स्पीकर के तौर तरीकों पर सवाल किया. इस पर अध्यक्ष सकते में आ गयीं और उन्होंने नाराजगी के साथ कहा कि आप इस प्रकार बात मत करिए. उन्होंने कहा कि मैंने किसी को बोलने की अनुमति नहीं देने की बात कभी नहीं कही. \n\n स्पीकर ने कहा, ‘मैं नियमों का अनुसरण कर रही हूं जो स्वयं सदन ने बनाए हैं.' उन्होंने साथ ही कहा कि वह सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करती रही हैं.' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री दो बार इस मुद्दे पर बोल चुके हैं और यह संभव नहीं है कि हर मुद्दे का समाधान निकल जाए. \n\n मुलायम सिंह ने कहा कि उन्हें भी सदन का लंबा अनुभव है और वह आसन में विश्वास रखते हैं, लेकिन आसन को परवाह नहीं है कि हम तथा बाकी अन्य सदस्य भी यहां बैठे हैं. उन्होंने सदन में मौजूद गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुखातिब होते हुए कहा, ‘आपकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. हमको बुला लेते, इनको (वाईएसआर कांग्रेस सदस्य) बुला लेते. इनकी मांग जायज हो तो मान लीजिए नहीं जायज है, तो इन्हें संतुष्ट करिए.' \n\n मुलायम ने जिस समय यह मामला उठाया उस समय कांग्रेसी सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे. वे दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं मिलने पर सदन से वाकआउट कर गए थे. अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार तो वह सदन नहीं चला सकतीं. हालांकि बाद में स्थिति संभल गई, पर सवाल तो उठ ही चुके थे. \n\n

यूपी में दलबदल चालू आहे

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं ,वैसे-वैसे वहां खेमा बदलने और सियासी उठापटक के मामले बढ़ते जा रहे हैं...
उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे वहां खेमा बदलने और सियासी उठापटक के मामले बढ़ते जा रहे हैं. दलबदल वहां इतनी तेजी से हो रहा है कि समझ ही नहीं आ रहा कि कौन सा विधायक कब किधर है. दर असल विधायकों में यह खलबली अपनी सीट बचाने को लेकर है. यह अलग बात है कि दल से ज्यादा उन्हें अपने वोटरों को साधना चाहिए पर जाति और दल पर टिकी सियासत के दौर में जनता की परवाह किसे है? \n\n उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होना है, यही कारण है कि सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. सभी राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हैं और अपने-अपने कैडर, वोटर्स को भी समेटने में जुटे हैं. ऐसे में कई ऐसे आयाराम-गयाराम भी हैं, जो उस ओर जाने के लिए तैयार बैठे हैं, जिसका पलड़ा भारी हो. फिलहाल सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को होता दिख रहा है. \n\n यही वजह है कि दस अगस्त को बसपा द्वारा कांग्रेस और सपा के कुल चार विधायकों को अपने दल में शामिल कराने के अगले दिन ही भाजपा ने भी बड़ा धमाका किया. उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की अगुआई में हुए एक समारोह में समाजवादी पार्टी के तीन, बहुजन समाज पार्टी के दो और कांग्रेस के तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए. यह आठों विधायक वहीं हैं, जिन्होंने राज्यसभा की वोटिंग के समय क्रॉस वोटिंग की थी. \n\n कांग्रेस का कहना है कि उसने उन सभी 11 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया था, जिन्होंने पार्टी लाइन के बाहर जाकर वोटिंग की थी. लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि उनके जाने से कांग्रेस को नुकसान होगा. उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के कुल 28 विधायक थे, जिनमें से 11 निकाले जा चुके हैं और जो दूसरी पार्टियों के संपर्क में हैं. ऐसे में कांग्रेस के पास अभी केवल 17 विधायक हैं. \n\n कांग्रेस के विधायकों का कहना है कि‍ पार्टी में सोनिया गांधी - राहुल गांधी से उनके इर्द-गिर्द रहने वाले नेता मिलने नहीं देते थे, इस वजह से हम जनता की परेशानियां उन तक पहुंचा नहीं पा रहे थे. कई बार अमेठी आए राहुल से इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन रवैया नहीं बदला. यही वजह है कि हमें कांग्रेस छोड़ना पड़ा. सपा के विधायक भी पार्टी से सस्पेंडेड हैं. \n\n भाजपा के पूर्व मंत्री जिसने बसपा ज्वाइन की है का भी कहना है कि भाजपा अब व्यक्ति केंद्रि‍त पार्टी हो गई है, इसलिए बसपा ज्वाइन की है. इस बीच बसपा से बगावत करके भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा मुखिया मायावती को दलितों के बजाय चुनाव के टिकट बेचने वाली ‘भ्रष्टाचार की देवी' करार दिया है. जाहिर है आरोपों और अदलाबदली का यह दौर अभी चलेगा. \n\n

गौरक्षकों पे प्रधानमंत्री ने तोड़ी चुप्पी, बोले असामाजिक तत्वों को दंडित किया जाए

देश में गौरक्षा के नाम पे बढ़ रही हिंसा पे प्रधानमंत्री ने चुप्पी तोड़ते हुए अपना नजरिये साफ किया है...
"देश में गौरक्षा के नाम पे बढ़ रही हिंसा पे प्रधानमंत्री ने चुप्पी तोड़ते हुए अपना नजरिये साफ किया है. प्रधानमंत्री ने गौरक्षा के नाम पे हो रही हिंसा की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए कहा की ऐसे गौरक्षक ज्यादातर फ़र्ज़ी हैं और ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए. उन्होंने कहा की यदि गौरक्षा के नाम पे लोगों से मारपीट करने वाले इन लोगों का इतिहास निकाला जाए तो इनमें से अस्सी फीसदी लोग अवैध गतिविधियों में लिप्त मिलेंगे. \n\n ऐसे असामाजिक तत्वों पे निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा की उन्हें इस बात पे बहुत गुस्सा आता है की कुछ लोग गौरक्षा के नाम पे अपनी दुकान चला रहे,ऐसे लोग रात में अवैध कामों में लिप्त रहते हैं और दिन में गौरक्षा का ढोंग करते है. साथ ही उन्होंने इस मामले को पूरी तरह से केंद्र की जिम्मेदारी से हटाते हुए राज्य सरकारो से भी आग्रह किया की अगर ऐसे लोगों पे एक फाइल बनाई जाए तो उनमें से 70-80 फीसदी लोग ऐसे कामों में लिप्त पाए जाएंगे जो समाज के लिए गैरकानूनी होंगे पर वो गौरक्षा का मुखौटा लगा के खुद को बचाने की कोशिश कर रहें हैं. \n\n पीएम के इस बयान को आरएसएस का भी साथ मिला, आरएसएस के भैयाजी जोशी ने कहा की कुछ लोग गौरक्षा के नाम पे देश का माहौल ख़राब करने लगे हुए हैं, ऐसे लोगों की वजह से उन लोगों का भी नाम ख्रराब होता है जो गायों की वास्तविक सेवा कर रहे और निरक्षड़ दे रहे, उहोने लोगो से अपील की ऐसे लोगों का भंडाफोड़ करना चाहिए. \n\n हालाँकि प्रधानमंत्री का ये बयान अखिल भारतीय हिंदूसभा को बिलकुल भी रास नहीं आया, यही नही उन्होंने तो इसके लिए प्रधानमंत्री को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दे डाली। उन्होंने कहा की यदि प्रधानमंत्री ने गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध नहीं लगाया तो देश की जनता उन्हें अगले लोक सभा चुनवो में सबक सिखाएगी. \n\n"

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने कहा उपराज्यपाल ही हैं दिल्ली के प्रशासक

हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कहा की दिल्ली आगे भी एक यूनियन टेरिटरी ही रहेगी और उपराज्यपाल ही इसके प्रमुख प्रशासक होंगे
"हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कहा की दिल्ली आगे भी एक यूनियन टेरिटरी ही रहेगी और उपराज्यपाल ही इसके प्रमुख प्रशासक होंगे. हाईकोर्ट ने दिल्ली सर्कार की उस दलील को भी दरकिनार कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था की उपराज्यपाल को मंत्रियों के दिशा निर्देश पे ही काम करना चाहिए, हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 239AA का हवाला देते हुए कहा की दिल्ली एक यूनियन टेरिटरी है लिहाजा इसके प्रशासक उपराज्यपाल ही रहेंगे और दिल्ली सरकार उनकी अनुमति के बिना कोई कानून नहीं बना सकती है. \n\n अरविन्द केजरीवाल के सत्ता सँभालने के बाद से ही उनके और उपराज्यपाल में टकराव का माहौल रहा है, उनकी हमेशा से ये शिकायत रही है की उपराज्यपाल नजीब जंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें अपने हिसाब से काम नहीं करने दे रहे और उनके काम में अवरोध डाल रहे हैं. \n\n हालाँकि इस मामले में अभी आम आदमी पार्टी ने हर नहीं मानी है और अब वो हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा की वो हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं पर वो इस से सहमत नहीं हैं और वो इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. \n\n दिल्ली सरकार ने भारतीय संविधान के आर्टिकल 131 का हवाला देते हुए कहा की यदि किन्ही दो राज्यो या राज्य और केंद्र में कोई मतभेद होता है तो उसका निपटारा करने का हक़ सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है, हाईकोर्ट इसपे अंतिम फैसला नहीं दे सकती है. \n\n हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद केजरीवाल विरोधी सुर भी तेज हो गए हैं, उपराज्यपाल नजीब जंग ने मामले पे अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा की ये जीत हार किसी की नहीं ये भारतीय संविधान की जीत है.कभी केजरीवाल के पूर्व सहयोगी रहे योगेंद्र यादव ने ट्वीट किया, दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले का सबक है,आप शासन की व्याकरण को जाने बगैर शासन नहीं कर सकते, भारतीय जनता पार्टी के सांसद महेश गिरी ने दिल्ली की सड़कों पे पोस्टर लगा के केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की है. \n\n"

धमकियों और विरोध प्रदर्शन के बिच इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए राजनाथ सिंह

जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद की धमकियों और इस्लामाबाद में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बिच गृहमंत्री राजनाथ सिंह...
"जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद की धमकियों और इस्लामाबाद में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बिच गृहमंत्री राजनाथ सिंह सार्क सम्मेलन की मीटिंग में हिस्सा लेने इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए. 2 दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे राजनाथ सिंह गत वर्ष पठानकोट बेस पे हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाते हुए इस्लामाबाद से कहेंगे की वे भारत में आतंकवाद प्रायोजित करना बंद करे. \n\n दोनों देश के बिच बने तनाव के माहौल के बिच उनकी ये यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही, हालाँकि भारत सरकार ने ये स्पष्ट किआ है की गृहमंत्री सिर्फ सार्क सम्मलेन का हिस्सा बनेंगे इसके अत्तिरिक्त वो पाकिस्तान के किसी भी मंत्री से किसी और विषय में कोई और मुलाकात नहीं करेंगे.इस दौरे पे सार्क देशो के सामने राजनाथ सिंह आतंकवाद के मुद्दे को प्राथमिकता देंगे इसके साथ ही पाकिस्तानी एजेंसीयों द्वारा नकली भारतीय नोट छापी जाना, छोटे हथियारों की तस्करी का मुद्दा भी उठाएंगे. \n\n उनकी इस यात्रा से पूर्व मुम्बई हमलों के आरोपी हफ़ीज़ सईद ने गीदड़ धमकी देते हुए कहा की यदि राजनाथ इस्लामाबाद आते हैं, तो इस्लामाबाद के साथ साथ पुरे पाकिस्तान में कड़ा विरोध प्रदर्शन होगा। आतंकी बुरानी की मौत से बौखलाए हफ़ीज़ ने राजनाथ सिंह को कश्मीरियों का हत्यारा बताते हुए कहा की क्या 'पाकिस्तान सरकार कश्मीरी भाइयों की हत्या के ज़िम्मेदार राजनाथ सिंह का फूलों की माला से स्वागत करेगी'? \n\n मामले की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने गृहमंत्री को राष्ट्रपति स्तर की सुरक्षा देने का फैसला किआ है उनकी सुरक्षा में पाकिस्तान की एलीट फाॅर्स के जवानों के साथ 200 कमांडोज़ को भी तैनात किआ जाएगा. \n\n"

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने दिया इस्तीफा

गुजरात में होने वाले आम चुनावो से महज एक साल पहले गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है..
"गुजरात में होने वाले आम चुनावो से महज एक साल पहले गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. पार्टी में चल रहे भेदभाव और राज्य में चल रहे असंतोष की वजह से उन्होंने ये फैसला लिया। माना जा रहा है की अमित शाह के नेतृत्व वाला बीजेपी समूह आनंदीबेन पटेल के कामकाज से संतुष्ठ नहीं था और इस से पहले उनको हटाया जाए उन्होंने खुद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. \n\n हालाँकि उन्होंने अपने बयान में उम्र का हवाला देते हुए कहा की पार्टी का नियम है की 75 वर्ष की आयु के बाद आपको अपना पद छोड़ना पड़ता है और वो इस वर्ष नवंबर में 75 वर्ष की होने वाली हैं, पर इसकी मुख्य वजह पिछले कई दिनों से हार्दिक पटेल के नेतृत्व में चल रहा पटेल आंदोलन और हाल ही में शुरू हुए दलित आंदोलन को सँभालने में सरकार की नाकामी मानी जा रही है. \n\n गुजरात की प्रथम महिला मुख्यमंत्रीं आनंदीबेन पटेल ने कार्यभार पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संभाल था, महज दो वर्षो बाद अपने पद से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा की मैंने दो महीने पहले ही पार्टी से गुजारिश की थी की मुझे अपने पदों से मुक्त कर दिया जाए और अभी फिर इस पत्र के माध्यम से यही अनुरोध कर रही हूं, राज्य में अगले साल होने वाले चुनावो और जनवरी में होने वाले वाइब्रेंट गुजरात महोत्सव से पूर्व अगले होने वाले मुख्यमंत्री को थोड़ा समय मिल जाएगा. \n\n"

दलित गाली मायावती और भाजपा

राजनीति में इनदिनों गाली हर मसले पर भारी है. दलितों की रक्षा के लिए संसद में चल रही बहस इतनी आसानी से मायावती पर शिफ्ट हो जाएगी इसका अंदाज तो खुद बसपा प्रमुख को नहीं रहा होगा
"""राजनीति में इनदिनों गाली हर मसले पर भारी है. दलितों की रक्षा के लिए संसद में चल रही बहस इतनी आसानी से मायावती पर शिफ्ट हो जाएगी इसका अंदाज तो खुद बसपा प्रमुख को नहीं रहा होगा. कहां मसला था हिंदू गो रक्षकों द्वारा गुजरात में दलितों पर अत्याचार का और कहां वह पहुंच गया उत्तर प्रदेश के भाजपा नेता द्वारा बसपा मुखिया को लेकर की गई बयानबाजी पर. उसके बाद तो उत्तर प्रदेश की सियासी माहौल गाली केंद्रित ही हो गया. \n\n हुआ यह कि भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप लगाते हुए कह दिया कि बसपा प्रमुख मायावती पार्टी का टिकट सुबह किसी और को, शाम को किसी और को और रात को किसी और को बेच देती हैं ऐसा तो वेश्या भी नहीं करती. भारतीय जनता पार्टी ने इस टिप्पणी को गलत माना और कार्रवाई करते हुए पहले सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से हटाया और बाद में पार्टी से भी छह साल के लिए निकाल दिया. \n\n यह मामला पहले तो संसद के दोनों सदनों में उठा. फिर पूरे यूपी में बसपा कार्यकर्ताओं और मायावती समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. यह पूरी तरह से प्रायोजित प्रदर्शन था जिसमें बसपा नेताओं के इशारे पर कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर सिंह की मां और बेटी के लिए अपशब्द बोलने शुरू कर दिए. \n\n मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने दयाशंकर को महिला के अपमान का अहसास कराने के लिए ही उनके परिवार को अपशब्द कहे. जिससे वो आगे कभी ऐसा शब्दों का प्रयोग ना करें. मायावती ने कहा कि अगर दयाशंकर की मां पत्नी और बेटी मीडिया में उनके बयान की निंदा करते तो उऩके खिलाफ कुछ नहीं होता. \n\n जवाब में दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह ने बसपा नेता से पूछा कि अगर बसपा के लोग मेरा कत्ल कर दें और कहें कि सबक सिखाने के लिए किया तो क्या मायावती तब भी उनका समर्थन करेंगी. स्वाति सिंह ने कहा उनके पति के बयान के लिए उनके परिवार को क्यों निशाना बनाया जा रहा है. आखिर, उनकी 12 साल की बेटी 80 साल की मां और उनकी क्या गलती है \n\n उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है और उन्हें सुरक्षा चाहिए. भाजपा ने भी देर से ही सही बेटी के सम्मान में बीजेपी मैदान में के नारे के साथ जवाबी आंदोलन शुरू किया. इस बीच दयाशंकर सिंह की मां की ओर से मायावती समेत बीएसपी के कई बड़े नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई है फिलहाल भाजपा बसपा दोनों आंदोलन में लगी हैं. सपा सरकार तमाशा देख रही है कांग्रेस मौन धरना के भरोसे है और देश को कई दशकों तक प्रधानमंत्री देने वाले राज्य में सियासी मर्यादा गालियों से तार-तार है. \n\n"""

आजाद फिर बब्बर अब दीक्षित के सहारे कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में लगता है कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पहले गुलाम नबी आजाद को प्रदेश का प्रभारी बनाया गया. फिर अपने जमाने के मशहूर हीरो रहे राज बब्बर को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया ...
"उत्तर प्रदेश में लगता है कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पहले गुलाम नबी आजाद को प्रदेश का प्रभारी बनाया गया. फिर अपने जमाने के मशहूर हीरो रहे राज बब्बर को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया और उस के बाद तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी शीला दीक्षित को यूपी के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बता दिया गया. दलील यह दी गई कि शीला के बहाने कांग्रेस ब्राह्मण वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है. \n\n यही वजह है कि कांग्रेस ने जो चार उपाध्यक्ष बनाए हैं उनमें एक राजेश मिश्रा भी हैं यही नहीं संजय सिंह को चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष बना कर कांग्रेस ने राजपूत वोटों पर भी निशाना साधा है. कांग्रेस की सोच है कि उत्तर प्रदेश चूंकि दिल्ली से सटा है इसलिए वहां के लोग शीला दीक्षित के 15 सालों के काम से वाकिफ हैं. \n\n दिल्ली की मेट्रो और फ्लाई ओवर के अलावा शीला के विकास के मॉडल को लेकर लोगों में उनकी इमेज उस नेता की है जो राज्य का हुलिया बदल सकती है. खास बात यह कि यूपी में पचहत्तर टुकड़ों में बंटी कांग्रेस में शीला का कोई अपना गुट नहीं है. यही बात राज बब्बर और गुलाम नबी पर भी लागू होती है. \n\n शीला के पक्ष में एक बात यह भी है कि उनकी छवि एक पढ़ी-लिखी, सुलझी महिला की है जो मोटे तौर पर विवादों में शामिल नहीं हैं. कांग्रेस की रणनीति इस बार के चुनाव में ब्राह्मण राजपूत मुस्लिम के अलावा गैर-जाटव वोटों को जो न तो बसपा की मयावती के साथ हैं न ही मुलायम की सपा के साथ को इकट्ठा करना है. \n\n कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में लगभग चार दशक तक इन्हीं वोटों के जरिए राज किया. हेमवती नंदन बहुगुणा कमलापति त्रिपाठी लोकपति त्रिपाठी और नारायणदत्त तिवारी का दौर था. शीला भी ब्राह्मण नेता उमाशंकर दीक्षित की बहू हैं और कन्नौज से लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं. कांग्रेस उन 120 सीटों पर फोकस करना चाहती है जिनमें से आधे पर ब्राह्मण और बाकी पर मुस्लिम वोट किसी को भी विधायक बना सकते हैं. \n\n कांग्रेस पिछले विधानसभा में 29 सीटों पर नंबर एक थी और 31 सीटों पर दूसरे नंबर पर थी. उसे लगता है कि इन सभी सीटों पर वह मेहनत करे तो जीत सकती है यहां वह प्रियंका गांधी की भूमिका देखती है. गुलाम नबी आजाद राज बब्बर संजय सिंह शीला दीक्षित की चौकड़ी के साथ प्रियंका गांधी को लाकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश से अपनी वापसी करना चाहती है. उसका मकसद उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोकना भी है और अपने को ऐसे हालात में लाना है कि हंग विधानसभा की दशा में वह सरकार का हिस्सा बन सके. \n\n कुल मिलाकर कांग्रेस इस बार यूपी में ग्लैमर के साथ हैवीवेट के सहारे मैदान में है. देखना यह है कि चुनवी मैदान में इन चेहरों के साथ वह साइकिल और हाथी के साथ साथ कमल से भी कैसे पार पाती है. \n\n"

जो खेले वो खिले पीएम मोदी का नया नारा

रिलांयस फाउंडेशन यूथ स्पोर्ट्स यानी आरएफवाईएस को अपनी शुरूआत में ही देश के खेल प्रेमी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सहारा मिल गया है...
रिलांयस फाउंडेशन यूथ स्पोर्ट्स यानी आरएफवाईएस को अपनी शुरूआत में ही देश के खेल प्रेमी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सहारा मिल गया है. प्रधानमंत्री ने रिलांयस स्पोर्ट्स फाउंडेशन को बधाई देते हुए कहा कि फुटबाल से शुरू कर आपने देश की युवा पीढ़ी के साथ जुड़कर खेल को मह्त्त्व देने का जो प्रयास किया है उससे मुझे विश्वास है कि देश को प्रतिभाएं ढूंढने में मदद मिलेगी. हमारा मूल मंत्र है जो खेले वो खिले. अगर आप खेलते ही नहीं है तो खिल भी नहीं सकते हैं. \n\n प्रधानमंत्री ने खुले दिल से इस तरह के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा है कि भारत जैसे देश में जहां पर करीब करीब 100 भाषाएं 1700 बोलियां तरह तरह के पहनावे भांति भांति के खान-पान हैं उसमें अगर एक छोर से दूसरे छोर तक जिला स्तर की टीमें 12 महीने खेलती रहें तो खेल ही हमारी राष्ट्रीय अखंडता का सबसे बड़ा आधार बन सकते हैं. \n\n प्रधानमंत्री ने कहा भारत में खेल तो व्यक्तित्व के विकास के साथ-साथ समाज के विकास का काम भी करते हैं. खेल अपने आपमें आम आदमी के जीवन का हिस्सा होना चाहिए और अगर खेल को हम जिंदगी का हिस्सा नहीं बनाते हैं तो जीवन एक प्रकार से विकसित नहीं होता है. \n\n प्रधानमंत्री का कहना था कि कुछ लोगों के दिमाग में ऐसा भरा पड़ा है कि खेल केवल शारीरिक फिटनेस के लिए जरूरी है लेकिन यह एक सीमित सोच है. सच तो यह है कि व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास के लिए खेल का जीवन का एक बड़ा हिस्सा होना बहुत जरूरी है. खेल से सामाजिक जीवन भी विकसित होता है और राष्ट्र जीवन भी विकसित होता है. \n\n उन्होंने कहा खेल में जीतने का जितना आनंद होता है उससे ज्यादा पराजय को पचाने की एक बहुत बड़ी ताकत आती है. जो व्यक्ति जिंदगी में खेलता रहता है वह कभी लुढ़क जाता है और फिर कभी उठकर खड़ा हो जाता है पर खेल की सीख के चलते वह कभी असल जिंदगी के विपरीत अवसरों पर हार नहीं मानता है. खेल एक जीवन के अंदर ऐसे गुणों का विकास करता है जिससे जीवन भर जूझने की सामर्थ्य पैदा होती है और खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता है. \n\n आरएफवाईएस का लक्ष्य पहले साल 2000 स्कूलों में 20 लाख बच्चों तक पहुंचना है. इसके लिए उसने छह सदस्यों का एक सलाहकार बोर्ड भी बनाया है जिसमें नीता अंबानी सचिन तेंदुलकर लिएंडर पेस सायना नेहवाल प्रो दीपक जैन और हीरो रणबीर कपूर शामिल हैं. \n\n

ब्रिटेन की ग्लैमरस प्रधानमंत्री थेरेसा मे

ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री थेरेसा मे आयरन लेडी करार दी गई मारगरेट थैचर जैसी कड़ियल तो नहीं पर उनसे कम भी नहीं. उन्हें डेविड कैमरन के पीएम पद छोड़ने के बाद कन्जरवेटिव पार्टी का नेता चुना गया था...
ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री थेरेसा मे आयरन लेडी करार दी गई मारगरेट थैचर जैसी कड़ियल तो नहीं पर उनसे कम भी नहीं. उन्हें डेविड कैमरन के पीएम पद छोड़ने के बाद कन्जरवेटिव पार्टी का नेता चुना गया था. \n\n एक अक्टूबर 1956 को इंग्लैंड के ईस्टबर्न में जन्मीं थेरेसा मे ने ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई की है. राजनीति की दुनिया में कदम रखने से पहले वह बैंक ऑफ इंग्लैंड में नौकरी करती थीं. उन के पति फिलिप जॉन मे भी एक बैंकर हैं. कहते हैं कॉलेज में ही एक डांस प्रोग्राम के दौरान बेनजीर भुट्टो जो खुद भी उसी कॉलेज में पढ़ रहीं थीं ने थेरेसा और फिलिप की एक दूसरे से मुलाकात कराई थी. \n\n थेरेसा और फिलिप की शादी सितंबर 1980 में हुई. इन्हें कोई औलाद नहीं है. फैंसी फुटवियर पहनने की शौकीन थेरेसा को चीते की खाल जैसे शू कलेक्शन का बेहद शौक है. कहते हैं वह योरोप में जहां कहीं भी जाती हैं उनके सैंडल की फोटो क्लिक करने के लिए होड़ मच जाती है. थेरेसा को क्रिकेट देखना बहुत पसंद है और उनकी हॉबी में वॉकिंग और कुकिंग शामिल है. वे एक इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि उनके घर में कुकिंग की 100 से अधिक किताबें हैं. \n\n गे और लेस्बियन शादी को निजी तौर पर सपोर्ट करने वालीं इस हाई प्रोफाइल सांसद ने 2014 में ऑउट फॉर मैरेज कैंपेन के लिए एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था. थेरेसा को लाइमलाइट और दिखावे की राजनीति पसंद नहीं है. वह अपने निजी जीवन को ज्यादा महत्व देती हैं और इससे जुड़ी बातों को अपने तक ही सीमित रखती हैं. इसलिए वह न्यूज चैनलों के दफ्तर भी नहीं जाती और ना ही संसद के रेस्तरां में लंच करती हैं. \n\n थेरेसा रोज सुबह जल्दी उठती हैं और हर मीटिंग में सबसे पहले पहुंचती हैं. उनके करीबी अफसर कहते हैं मीटिंग के लिए वह पूरी तरह तैयारी करती हैं और उनका दावा है कि वह हर किसी से पांच गुना ज्यादा ही जानकारी रखती हैं. थेरेसा मे की तुलना जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल से की जाती है. मार्केल और थेरेसा दोनों के पिता चर्च में पादरी थे और दोनों को ही पहाडों की सैर करने का शौक है. \n\n जुलाई 2013 में खबर आई थी कि थेरेसा मे को टाइप 1 डायबीटिज है और उनकी सेहत गिर रही है लेकिन बावजूद इसके थेरेसा ने अपना पॉलिटिकल कॅरियर जारी रखा. टेररिज्म एक्ट 2000 के इस्तेमाल और पासपोर्ट आवेदनों के निपटारे जैसे कुछ मामलों को लेकर गृह मंत्री के तौर पर थेरेसा विवादों में भी रहीं. \n\n

जब सिंधिया को समझ नहीं आया यह शब्द

उर्दू की एक चर्चित कहावत है कि नुक्ते के फेर में खुदा जुदा हो गए. दरअसल यह भाषा के नुक्ते से जुड़ी हकीकत है. खुदा और जुदा जब उर्दू लिपी में लिखते हैं तो उसमें केवल एक बिंदी का अंतर है...
उर्दू की एक चर्चित कहावत है कि नुक्ते के फेर में खुदा जुदा हो गए. दरअसल यह भाषा के नुक्ते से जुड़ी हकीकत है. खुदा और जुदा जब उर्दू लिपी में लिखते हैं तो उसमें केवल एक बिंदी का अंतर है. बिंदी ऊपर लगती है तो खुदा और नीचे लगती है तो जुदा हो जाता है. आम जीवन में इन बातों का अर्थ भले न हो पर सियासत में शब्दों का चयन ही सब कुछ है. \n\n इसका अहसास पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को बखूबी हुआ जब उन्होंने न समझने के चलते कश्मीर से जुड़े एक मसले पर एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया जो उन्हें नहीं करना था. बाद में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को पत्र लिख कर अपने भाषण से रायशुमारी शब्द को हटा कर उसकी जगह चर्चा लिखने का अनुरोध किया जिसे स्पीकर ने मान भी लिया. \n\n दरअसल जम्मू कश्मीर के हालात पर चर्चा के दौरान सिंधिया रायशुमारी शब्द का प्रयोग कर दिया. उन्होंने कहा था कि कश्मीर में आज रायशुमारी की जरूरत है. रायशुमारी उर्दू का शब्द है. इसका मतलब जनमत संग्रह या प्लेबिसाइट होता है. कश्मीर के मामले में यह एक विवादित शब्द है क्योंकि अलगाववादी मांग करते रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र में किए गए दूसरे मसलों की तरह ही कश्मीर में प्लेबिसाइट या जनमत संग्रह कराया जाए. \n\n सिंधिया ने बाद में जब अपना भाषण सुना और दूसरे बड़े नेताओं ने उनका ध्यान उस तरफ खींचा तो उन्होंने ट्वीट कर सफाई दी कि उनका तात्पर्य चर्चा से था. उन्होंने लिखा कि मेरी ग़लती मुझे चर्चा के लिए उर्दू का गलत शब्द दिया गया और गलत समझा गया. मैंने कश्मीर में प्लेबिसाइट की बात नहीं की. मेरा पूरा भाषण पढ़ें. \n\n सिंधिया के मुताबिक वह कश्मीर के लोगों से चर्चा या संवाद की बात कह रहे थे. उनका मतलब जनमत संग्रह क़तई नहीं था. याद रहे कि इस चर्चा के अगले दिन जवाब देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता के इस रुख़ की ओर इशारा भी किया था. बाद में सूचना प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सिंधिया ने स्पीकर को पत्र लिख कर अपनी बात स्पष्ट कर दी है इसलिए यह मामला अब समाप्त हो गया है. \n\n

दिल्ली पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बिच दूरियां और बढ़ती ही जा रही है....
"दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बिच दूरियां और बढ़ती ही जा रही है. आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान और नरेश यादव की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली सरकार पुलिस का चेहरा खुलेआम सबके सामने लाने के लिए हाईकोर्ट में याचना करेगी. आम आदमी पार्टी का कहना है की सोची साजिश के तहत उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है. \n\n साथ ही साथ आम आदमी पार्टी के संयोजक दिलीप पांडेय का कहना है की पुलिस केंद्र सरकार के दबाव में आकर काम कर रही है. और साथ ही उनका कहना ये है की 'पंजाब पुलिस पहले ही आम आदमी पार्टी के नेताओं को गिरिफ्तार कर रही है, अब गुजरात और गोवा पुलिस को भी दिल्ली आना चाहिए'. \n\n शनिवार को दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के दो नेताओ को अलग अलग मामलों में गिरफ्तार किया था. दिलीप पांडेय का कहना है की पुलिस जान बूझ के उनकी पार्टी के नेताओं को परेशान कर रही है. अमानतुल्लाह खान को एक महिला को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, पार्टी का कहना है की महिला 3 बार अपना बयान बदल चुकी है और वो पुलिस के दबाव में आकर ऐसा कर रही है. \n\n आम आदमी पार्टी काफी दिनों से दिल्ली पुलिस को अपने नियंत्रण में करने की अपील कर रही है, और केंद्र सरकार के अधीन में काम करने वाली दिल्ली पुलिस के काम की आलोचना करती आ रही है. अब देखना ये है की इस नए मामले के बाद दिल्ली पुलिस और सरकार के बिच कितना मतभेद बढ़ता है. \n\n"

नरेंद्र मोदी लहर ने विरोधियों के साथ मुझे भी डूबा दिया : नवजोत सिंह सिद्धू

राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद आखिरकार पूर्व क्रिकेटर और सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी चुप्पी तोड़ी और साफ किया की ये निर्णय उन्होंने क्यूँ लिया...
"राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद आखिरकार पूर्व क्रिकेटर और सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी चुप्पी तोड़ी और साफ किया की ये निर्णय उन्होंने क्यूँ लिया. \n\n मैदान पे लंबे लंबे छक्को और माइक पे लंबे संवादों से लोगों का मुंह बंद करने वाले सिद्धू ने जब आज अपना मुंह खोला तो बीजेपी के खिलाफ उनका रवैया बहुत सख्त दिखा. इस्तीफा देने का कारण बताते हुए उन्होंने कहा की उन्हें पंजाब से दूर रहने को कहा गया इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा की पंजाब उनका घर है और वे इस से दूर नहीं रह सकते.अपने ही अंदाज़ में उन्होंने कहा 'पंक्षी शाम को अपने घर ही लौटता है, फिर सिद्धू पंजाब कैसे छोड़ सकता है'. \n\n उन्होंने बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा की मुझे बिना कोई कारण बताए पंजाब से दूर रहने को कहा, जिस पंजाब ने मुझे चार बार चुना उस पंजाब को मै कैसे छोड़ सकता हूं.मेरे लिए दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है, जहां पंजाब का हित होगा सिद्धू वहीं होगा. \n\n यहां उन्होंने प्रधानमंत्री को भी निशाने पे लिया, सिद्धू ने कहा की 'सिद्धू को तब पंजाब से चुनाव लड़ने बोला, जब विरोधी लहर थी. सिद्धू जीता. लोगों ने विश्वास किया और चार बार मौका दिया. लेकिन जब मोदी साहब की लहर आई तो विरोधी डूबे ही, सिद्धू को भी डुबो दिया'. \n\n सिद्धू के बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद उनकी आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने की खबर चल रही थी ,हालांकि वो आम आदमी पार्टी में सम्मिलित होने के सवाल को टाल गए , उन्होंने कहा की जहां पंजाब का हित होगा वे वहीं मिलेंगे. \n\n"

उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले प्रधानमंत्री का पूर्वांचल दौरा

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव की तयारी बीजेपी ने अभी से चालू कर दी है....
"उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव की तयारी बीजेपी ने अभी से चालू कर दी है, उसी सिलसिले में गोरखपुर पहुंचे प्रधानमंत्री ने गोरखपुर को खाद फैक्ट्री और एम्स के रूप में दो बड़े तोहफे दे डाले. प्रधानमंत्री ने 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले जब गोरखपुर आये थे तब उन्होंने ने एम्स और खाद कारखाने डालने का वादा किआ था. और आज वो अपनी बात पे मुहर लगाने पहुंचे तो वहां के स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओ में गजब का उत्साह देखने को मिला. इस दौरान उनके साथ राजयपाल राम नाइक और गोरखपुर के प्रसिद्ध योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे. \n\n अपनी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री ने गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में दर्शन कर के की. यहां संतो की सराहना करते हुए कहा की धर्मकर्म के काम के साथ साथ समाज को अजय बढ़ने में शान्तो का योगदान अहम रहा है। कई संत पशुओं के लिए काम करते हैं कई अपने भक्तो को सौचालय बनाने के लिए प्रेरित करते हैं, कई स्वस्थ कैंप लगवाते है, देश को आगे बढ़ाने में संतो की भूमिका अहम रही है. \n\n प्रधानमंत्री ने कहा की पूर्वी भारत के किसानों के साथ अन्याय हो रहा , इस देश को एक और हरित क्रांति की जरूरत है, उन्होंने बताया की इस महँगाई के ज़माने में किसान हिट के लिए उनकी सरकार ने यूरिया के दामों में भारी गिरवाट की है. \n\n साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को सुनाते हुए कहा की परिवार की राजनीति बंद करो, जातिवाद के नाम पे जहर फैलाना बंद करो, लखनऊ को एक तेज दौड़ने वाली सरकार की जरुरत है. \n\n"

मायावती को अपशब्द कहने पर लखनऊ में हंगामा,बीजेपी उपाध्य्क्ष निष्कासित

बसपा सुप्रीमो को अप्सब्द कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है ,बीएसपी नेता आज हज़रतगंज की सड़को पे जुटे...
"बसपा सुप्रीमो को अप्सब्द कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है , बीएसपी नेता आज हज़रतगंज की सड़को पे जुटे और बीजेपी के दयाशंकर के खिलाफ जम कर नारेबाजी की. बीएसपी नेताओं ने ये साफ जाहिर कर दिया की ये मामला माफ़ी मांगने से खत्म नहीं होगा और इस पर कानूनी कार्यवाही होगी. \n\n मामला ,उत्तर प्रदेश के मऊ जिले का है जहां बीजेपी के दयाशंकर सिंह ने मायावती के टिकट बांटने के अंदाज़ की वेस्यवृति से तुलना कर दी थी. उन्होंने कहा था की ""अगर कोई उन्हें 1 करोड़ देगा तो वो उसे टिकट देंगी , पर अगर एक घंटे बाद कोई उन्हें 2 करोड़ देगा तो टिकट उसे दे देंगी , और अगर शाम को कोई 3 करोड़ देगा तो उसे प्रत्याशी बना लेंगी "" फिर उनकी तुलना वेश्या से करते हुए कहा की इस से अच्छी तो वेश्या होतीं हैं जो अपने वादों पे खरी उतरती हैं. \n\n ये मामला राज्यसभा में भी उठा जिसकी एक सुर में सबने निंदा की, इस मामले पे अरुण जेटली ने कहा 'यह सही नहीं है और मैं ऐसे शब्दों के उपयोग की निंदा करता हूं और अगर किसी व्यक्ति ने ऐसा कहा है तो हम इसकी जांच करेंगे. मैं निजी तौर पर खेद व्यक्त करता हूं। मैं आपके सम्मान के साथ संबद्ध हूं और आपके साथ खड़ा हूं.' \n\n इस मामले के बाद बीजेपी ने दयाशंकर सिंह को उत्तर प्रदेश के बीजेपी उपाद्यक्ष के पद से हटा दिया है, और उन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. \n\n"
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