Masala Diary

बिहार में योग के नाम पर सियासत नहीं

बिहार कई मामलों में देश भर से अपनी अलग राय रखता है. शायद इसकी वजह उसका शानदार सांस्कृतिक इतिहास है, जो पाटलीपुत्र से बोधगया तक समान रूप से फैला हुआ है. यही वजह थी कि जून के दूसरे पखवारे में जब समूची दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही थी और बिहार से जुड़े कई केंद्रीय मंत्री राज्य में कई जगहों पर जनता के साथ मिलकर योगासन और प्राणायाम के गुर सीख और सिखा रहे थे, तब नीतीश सरकार के मंत्रियों ने अपने को 'योग दिवस' के आयोजन से दूर रखा.

बिहार सरकार ने विश्व योग दिवस पर ना तो कोई कार्यक्रम आयोजित किया और न ही बिहार सरकार का कोई मंत्री या विधायक योग के किसी कार्यक्रम में शामिल हुआ. जबकि आयोजन समिति के सदस्यों ने खुद जाकर सीएम, डिप्टी सीएम से लेकर सरकार के अधिकतर मंत्री और जदयू-राजद के नेताओं को निमंत्रित किया था, लेकिन भाजपा नेताओं को छोड़कर बिहार भर में हुए योग के किसी कार्यक्रम में सरकार के कोई भी नुमाइंदा शामिल नहीं हुआ. रविशंकर प्रसाद , गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव उन केंद्रीय मंत्रियों में रहे, जिन्होंने राज्यभर में अलग-अलग जगहों पर योग शिविर की अगुवाई की. आरोप लगा कि बिहार सरकार वर्ल्ड म्यूजिक डे मना रही है, योग दिवस नहीं.

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कहा कि अगर बिहार के मुख्यमंत्री और मंत्री भी योग कार्यक्रम में हिस्सा लेते तो अच्छा लगता और साथ ही पूरे देश में एक अच्छा संदेश भी जाता. हालांकि, रविशंकर प्रसाद ने योग पर राजनीति नहीं करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि योग राजनीति और सत्ता या विपक्ष से ऊपर है. इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए.

रविशंकर प्रसाद ने इस मौके पर योगा से संबंधित 370 रुपए का डाक टिकट भी खरीदा. प्रसाद ने यह भी कहा कि तंदुरूस्त रहने की इस प्राचीन पद्धति को बड़े पैमाने पर आयोजित करने से लोगों के बीच एकता को बढ़ावा मिलता है. उन्होंने योग को वैश्विक कार्यक्रम बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ भी की. केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मंझौले उपक्रम राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार इस आधार पर योग का विरोध कर रहे हैं कि यह बीजेपी और केंद्र की एनडीए सरकार का एक प्रचार अभियान है. उन्होंने ताना मारा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नीतीश कुमार की नाराजगी समझ सकता हूं, लेकिन योग से नहीं. चाहे सियासी वजह रही हो या रमजान का महीना, पर सच तो यह है कि राज्य के मुस्लिम समुदाय ने भी इस दिवस पर अपनी शिरकत नहीं की.


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