Masala Diary

रंगून व गुजरात के सीएम रुपानी

"एक समय गुजरात के नए सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे नितिन पटेल को पछाड़ने वाले विजय रुपानी ने गुजरात के सोलहवें मुख्यमंत्री के तौर पर जब गांधीनगर में शपथ ली तो राष्ट्रीय मीडिया को उनके बारे में कुछ खास पता नहीं था. दर असल रूपानी का सियासी सफर काफी रोचक रहा है.

गुजरात विधानसभा के लिए पहली बार निर्वाचित हुए 60 साल के रुपानी जैन समुदाय से हैं, जिसे हाल ही में गुजरात सरकार ने अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है. गुजरात में राजनीतिक रुप से महत्त्वपूर्ण सौराष्ट्र क्षेत्र में खासी पकड रखने वाले रुपानी का जन्म साल 1956 में बर्मा, अब म्यामांर, के रंगून, अब यंगून में रमणीकलाल रुपानी के घर हुआ था, पर पालन पोषण राजकोट में हुआ.

बीए और एलएलबी की डिग्री ले चुके रुपानी ने कालेज के दिनों से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी जब वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडे थे. 1970 के दशक में वह नवनिर्माण आंदोलन के समय छात्र संघर्ष समिति में शामिल हो गए. रुपानी उन शुरुआती लोगों में से हैं, जिन्होंने जय प्रकाश नारायण के कहने पर छात्र आंदोलन में भागीदारी की. आपातकाल के दौरान उन्होंने भुज और भावनगर जेलों में करीब एक साल बिताया.

साल 1987 में वह पहली बार राजकोट के पार्षद चुने गए. इसके बाद उन्हें शहर की भाजपा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया. साल 1988 और 1996 के बीच वह राजकोट निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे और साल 1996-97 में महापौर बने. रुपानी को राजकोट का सौराष्ट्र क्षेत्र में औद्योगिक केंद्र के तौर पर विकास करने के लिए उनके अथक प्रयासों के चलते भी जाना जाता है. वह भाजपा की राज्य इकाई के चार बार महासचिव बनाए गए.

रुपानी जब राज्य पर्यटन निगम के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने राज्य को पर्यटन डेस्टिनेशन बनाने के लिए ‘खुशबू गुजरात की' अभियान चलाया था. साल 2006 से 2012 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे और उस दौरान उन्हें जल संसाधन, खाद्य, लोक वितरण सहित अन्य संसदीय समितियों में चुना गया.

साल 2013 में वह गुजरात म्यूनिसिपल फायनेंस बोर्ड के अध्यक्ष चुने गए. अक्तूबर 2014 में उन्होंने राजकोट पश्चिम विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव जीता. विजय रुपानी 19 फरवरी को भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बने थे तब इसे पार्टी की राज्य इकाई में अमित शाह गुट की जीत के तौर पर देखा गया.

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