Masala Diary

स्पीकर पर सवाल

हमारी सियासी व्यवस्था में संसद सर्वोच्च है. इससे ऊपर कोई नहीं, क्योंकि राजनीति के जानकार जानते हैं कि संविधान और राष्ट्रपति भी संसद का ही एक हिस्सा हैं. ऐसे में अगर लोकसभा या राज्य सभा के प्रमुखों पर कोई सदस्य आरोप लगाता है तो अचरज होता है. पर हमारे आज के नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं.

तभी तो आंध्र प्रदेश के मुद्दे पर लोकसभा में पिछले सप्ताह भर से जारी हंगामे और नारेबाजी के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने स्पीकर से नाराज हो कर कहा कि यह क्या तरीका है? इस प्रकार हंगामे के बीच कैसे सदन चलाया जा रहा है, तब स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उनके आरोपों का सख्ती से खंडन करते हुए कहा कि कोई भी बात होती है, तो सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाकर विचार-विमर्श किया जाता है. सदन सदस्यों और बहस के लिए ही तो है.

हुआ दरअसल यह कि वाईएसआर कांग्रेस के सदस्यों द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर जब आसन के समक्ष नारेबाजी की जा रही थी, तो सपा मुखिया मुलायम सिंह अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए और आसन से कहा कि कभी हम लोगों को भी बोलने का मौका दें. इस पर जब अध्यक्ष ने उनकी बात को हंसी में उड़ाने की कोशिश की तो मुलायम सिंह नाराज हो गए.

मुलायम फिर रुके नहीं. उन्होंने कहा, ‘आप हंसी में हमारी बात को टाल रही हैं. लोकतंत्र बातचीत से चलता है. बड़े-बड़े स्पीकर देखे हैं हमने.' उन्होंने सदन संचालन के स्पीकर के तौर तरीकों पर सवाल किया. इस पर अध्यक्ष सकते में आ गयीं और उन्होंने नाराजगी के साथ कहा कि आप इस प्रकार बात मत करिए. उन्होंने कहा कि मैंने किसी को बोलने की अनुमति नहीं देने की बात कभी नहीं कही.

स्पीकर ने कहा, ‘मैं नियमों का अनुसरण कर रही हूं जो स्वयं सदन ने बनाए हैं.' उन्होंने साथ ही कहा कि वह सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करती रही हैं.' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री दो बार इस मुद्दे पर बोल चुके हैं और यह संभव नहीं है कि हर मुद्दे का समाधान निकल जाए.

मुलायम सिंह ने कहा कि उन्हें भी सदन का लंबा अनुभव है और वह आसन में विश्वास रखते हैं, लेकिन आसन को परवाह नहीं है कि हम तथा बाकी अन्य सदस्य भी यहां बैठे हैं. उन्होंने सदन में मौजूद गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुखातिब होते हुए कहा, ‘आपकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. हमको बुला लेते, इनको (वाईएसआर कांग्रेस सदस्य) बुला लेते. इनकी मांग जायज हो तो मान लीजिए नहीं जायज है, तो इन्हें संतुष्ट करिए.'

मुलायम ने जिस समय यह मामला उठाया उस समय कांग्रेसी सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे. वे दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं मिलने पर सदन से वाकआउट कर गए थे. अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार तो वह सदन नहीं चला सकतीं. हालांकि बाद में स्थिति संभल गई, पर सवाल तो उठ ही चुके थे.


Laoding...