Masala Diary

यूपी में दलबदल चालू आहे

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे वहां खेमा बदलने और सियासी उठापटक के मामले बढ़ते जा रहे हैं. दलबदल वहां इतनी तेजी से हो रहा है कि समझ ही नहीं आ रहा कि कौन सा विधायक कब किधर है. दर असल विधायकों में यह खलबली अपनी सीट बचाने को लेकर है. यह अलग बात है कि दल से ज्यादा उन्हें अपने वोटरों को साधना चाहिए पर जाति और दल पर टिकी सियासत के दौर में जनता की परवाह किसे है?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होना है, यही कारण है कि सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. सभी राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटे हैं और अपने-अपने कैडर, वोटर्स को भी समेटने में जुटे हैं. ऐसे में कई ऐसे आयाराम-गयाराम भी हैं, जो उस ओर जाने के लिए तैयार बैठे हैं, जिसका पलड़ा भारी हो. फिलहाल सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को होता दिख रहा है.

यही वजह है कि दस अगस्त को बसपा द्वारा कांग्रेस और सपा के कुल चार विधायकों को अपने दल में शामिल कराने के अगले दिन ही भाजपा ने भी बड़ा धमाका किया. उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की अगुआई में हुए एक समारोह में समाजवादी पार्टी के तीन, बहुजन समाज पार्टी के दो और कांग्रेस के तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए. यह आठों विधायक वहीं हैं, जिन्होंने राज्यसभा की वोटिंग के समय क्रॉस वोटिंग की थी.

कांग्रेस का कहना है कि उसने उन सभी 11 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया था, जिन्होंने पार्टी लाइन के बाहर जाकर वोटिंग की थी. लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि उनके जाने से कांग्रेस को नुकसान होगा. उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के कुल 28 विधायक थे, जिनमें से 11 निकाले जा चुके हैं और जो दूसरी पार्टियों के संपर्क में हैं. ऐसे में कांग्रेस के पास अभी केवल 17 विधायक हैं.

कांग्रेस के विधायकों का कहना है कि‍ पार्टी में सोनिया गांधी - राहुल गांधी से उनके इर्द-गिर्द रहने वाले नेता मिलने नहीं देते थे, इस वजह से हम जनता की परेशानियां उन तक पहुंचा नहीं पा रहे थे. कई बार अमेठी आए राहुल से इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन रवैया नहीं बदला. यही वजह है कि हमें कांग्रेस छोड़ना पड़ा. सपा के विधायक भी पार्टी से सस्पेंडेड हैं.

भाजपा के पूर्व मंत्री जिसने बसपा ज्वाइन की है का भी कहना है कि भाजपा अब व्यक्ति केंद्रि‍त पार्टी हो गई है, इसलिए बसपा ज्वाइन की है. इस बीच बसपा से बगावत करके भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा मुखिया मायावती को दलितों के बजाय चुनाव के टिकट बेचने वाली ‘भ्रष्टाचार की देवी' करार दिया है. जाहिर है आरोपों और अदलाबदली का यह दौर अभी चलेगा.


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