आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने कहा उपराज्यपाल ही हैं दिल्ली के प्रशासक

"हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए कहा की दिल्ली आगे भी एक यूनियन टेरिटरी ही रहेगी और उपराज्यपाल ही इसके प्रमुख प्रशासक होंगे. हाईकोर्ट ने दिल्ली सर्कार की उस दलील को भी दरकिनार कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था की उपराज्यपाल को मंत्रियों के दिशा निर्देश पे ही काम करना चाहिए, हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 239AA का हवाला देते हुए कहा की दिल्ली एक यूनियन टेरिटरी है लिहाजा इसके प्रशासक उपराज्यपाल ही रहेंगे और दिल्ली सरकार उनकी अनुमति के बिना कोई कानून नहीं बना सकती है.

अरविन्द केजरीवाल के सत्ता सँभालने के बाद से ही उनके और उपराज्यपाल में टकराव का माहौल रहा है, उनकी हमेशा से ये शिकायत रही है की उपराज्यपाल नजीब जंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें अपने हिसाब से काम नहीं करने दे रहे और उनके काम में अवरोध डाल रहे हैं.

हालाँकि इस मामले में अभी आम आदमी पार्टी ने हर नहीं मानी है और अब वो हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा की वो हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं पर वो इस से सहमत नहीं हैं और वो इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.

दिल्ली सरकार ने भारतीय संविधान के आर्टिकल 131 का हवाला देते हुए कहा की यदि किन्ही दो राज्यो या राज्य और केंद्र में कोई मतभेद होता है तो उसका निपटारा करने का हक़ सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है, हाईकोर्ट इसपे अंतिम फैसला नहीं दे सकती है.

हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद केजरीवाल विरोधी सुर भी तेज हो गए हैं, उपराज्यपाल नजीब जंग ने मामले पे अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा की ये जीत हार किसी की नहीं ये भारतीय संविधान की जीत है.कभी केजरीवाल के पूर्व सहयोगी रहे योगेंद्र यादव ने ट्वीट किया, दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले का सबक है,आप शासन की व्याकरण को जाने बगैर शासन नहीं कर सकते, भारतीय जनता पार्टी के सांसद महेश गिरी ने दिल्ली की सड़कों पे पोस्टर लगा के केजरीवाल के इस्तीफे की मांग की है.

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