Masala Diary

जब सिंधिया को समझ नहीं आया यह शब्द

उर्दू की एक चर्चित कहावत है कि नुक्ते के फेर में खुदा जुदा हो गए. दरअसल यह भाषा के नुक्ते से जुड़ी हकीकत है. खुदा और जुदा जब उर्दू लिपी में लिखते हैं तो उसमें केवल एक बिंदी का अंतर है. बिंदी ऊपर लगती है तो खुदा और नीचे लगती है तो जुदा हो जाता है. आम जीवन में इन बातों का अर्थ भले न हो पर सियासत में शब्दों का चयन ही सब कुछ है.

इसका अहसास पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को बखूबी हुआ जब उन्होंने न समझने के चलते कश्मीर से जुड़े एक मसले पर एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया जो उन्हें नहीं करना था. बाद में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को पत्र लिख कर अपने भाषण से रायशुमारी शब्द को हटा कर उसकी जगह चर्चा लिखने का अनुरोध किया जिसे स्पीकर ने मान भी लिया.

दरअसल जम्मू कश्मीर के हालात पर चर्चा के दौरान सिंधिया रायशुमारी शब्द का प्रयोग कर दिया. उन्होंने कहा था कि कश्मीर में आज रायशुमारी की जरूरत है. रायशुमारी उर्दू का शब्द है. इसका मतलब जनमत संग्रह या प्लेबिसाइट होता है. कश्मीर के मामले में यह एक विवादित शब्द है क्योंकि अलगाववादी मांग करते रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र में किए गए दूसरे मसलों की तरह ही कश्मीर में प्लेबिसाइट या जनमत संग्रह कराया जाए.

सिंधिया ने बाद में जब अपना भाषण सुना और दूसरे बड़े नेताओं ने उनका ध्यान उस तरफ खींचा तो उन्होंने ट्वीट कर सफाई दी कि उनका तात्पर्य चर्चा से था. उन्होंने लिखा कि मेरी ग़लती मुझे चर्चा के लिए उर्दू का गलत शब्द दिया गया और गलत समझा गया. मैंने कश्मीर में प्लेबिसाइट की बात नहीं की. मेरा पूरा भाषण पढ़ें.

सिंधिया के मुताबिक वह कश्मीर के लोगों से चर्चा या संवाद की बात कह रहे थे. उनका मतलब जनमत संग्रह क़तई नहीं था. याद रहे कि इस चर्चा के अगले दिन जवाब देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता के इस रुख़ की ओर इशारा भी किया था. बाद में सूचना प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सिंधिया ने स्पीकर को पत्र लिख कर अपनी बात स्पष्ट कर दी है इसलिए यह मामला अब समाप्त हो गया है.

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