Masala Diary

पेट से हैं, तो क्या हुआ

कुछ जोड़े पेट से बीवी के होते ही घबड़ा जाते हैं कि अब वह आपस में संबंध बना पाएंगे या नहीं. कुछ जहां इसे संबंध के लिए अच्छा समय मानते हैं...
कुछ जोड़े पेट से बीवी के होते ही घबड़ा जाते हैं कि अब वह आपस में संबंध बना पाएंगे या नहीं. कुछ जहां इसे संबंध के लिए अच्छा समय मानते हैं, वहीं, कुछ के लिए यह चिंता या भय का समय हो सकता है. अनेक जोड़े इस बारे में चिंता करते हैं, परंतु अगर आपके पेट से होने के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा है, तो आप अपनी पानी की थैली फटने तक संबंध बना सकती हैं. \n\n मगर, यदि आपकी ग्रीवा कमज़ोर है, अपरा नीचे की तरफ स्थित है या खून बहने की समस्या है, तो अपनी डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें. सामान्य तौर पर पेट से होने के बाद संबंध बनाने से गर्भपात या आपके अंग पर संक्रमण का खतरा नहीं होता. अगर अंग पर इन्फेक्शन हो भी गया हो, तो ज़्यादा चिंतित न हों. संबंध बनाना इंफेक्शन के एंटीबायोटिक उपचार में बाधा नहीं डालता है. \n\n यह भी जान लें कि इंफेक्शन के बावजूद, संबंध बनाने की वजह से बच्चे के समय पूर्व जन्म लेने की संभावना काफी कम रहती है. हां इतना जरूर है कि अगर आपको इंफेक्शन है, तो आपके पति कंडोम का इस्तेमाल ज़रूर करना चाहिए, ताकि उन्हें इंफेक्शन न हो. \n\n अगर आप सेक्स के मूड में हैं और अच्छा महसूस कर रहीं हैं, तो पूरी गर्भावस्था के दौरान प्रेम संबंध जारी रखना अच्छी बात है. इस समय संतोषजनक प्रेम संबंध आपके रिश्ते के लिए अच्छा है - गर्भावस्था के दौरान भी और शिशु के जन्म के बाद भी. एक बात और सेक्स से आपके बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, चाहे आपके पति आपके ऊपर आकर इसे करें. \n\n आपके चरम सुख पाने के बाद आपको महसूस हो सकता है कि बच्चा कुछ ज़्यादा हिल-डुल रहा है. पर यह आपके तेज धड़कते दिल के कारण है, न कि इस कारण की उसे पता है क्या हो रहा है या फिर उसे कोई असुविधा महसूस हो रही है. \n\n हर महिला का अनुभव अलग होता है. यद्यपि, सेक्स करना सुरक्षित माना जाता है, मगर अधिकांश जोड़े गर्भावस्था के आरंभ होने के साथ ही अपने यौन संबंधों में बदलाव महसूस करते हैं. कुछ गर्भवती महिलाओं को सेक्स अब पहले से बेहतर लग सकता है, वहीं कुछ को थोड़ा असहज और एक बोझ सा लग सकता है. हो सकता है कि आपके पति को आपका शरीर और अधिक आकर्षक लगे. इसलिए घबड़ाएं नहीं. संबंध के मजे लूटें, पर एक सीमा में ही. क्योंकि जो पेट में है वह भी तो आप दोनों की ही जिम्मेदारी है. \n\n

मशीन से सेंसेशन

दुनिया भर में सेक्स खिलौनों का व्यापार लगभग 15 करोड़ डालर के लगभग है. और यह 30 फ़ीसदी की रफ़्तार से बढ़ रहा है...
दुनिया भर में सेक्स खिलौनों का व्यापार लगभग 15 करोड़ डालर के लगभग है. और यह 30 फ़ीसदी की रफ़्तार से बढ़ रहा है. लगातार नए-नए उत्पाद बाज़ार में शामिल हो रहे हैं. तो भले ही आप इन खिलौनों के उपयोग में दिलचस्पी न रखते हों, लेकिन अपने शेयर बाज़ार के पोर्टफोलियो में इजाफा के लिए आप इन्हें जाने जरूर, वैसे इनके इस्तेमाल में भी कम मजा नहीं. \n\n वाइब्रेटर सबसे जल्दी और सबसे ज़ोरदार ओर्गास्म देते हैं. महिलाएं चिंतित होती हैं की कहीं वाइब्रेटर का इस्तेमाल उनके साथी को कुछ करने लायक ही ना छोड़ें, पर जिन महिलाओं को चरम आनंद में परेशानी होती है, उनके लिए वाइब्रेटर एक अच्छा जवाब है, ऐसा मेडिकल सेंटर फॉर फीमेल सेक्सुअलिटी में किये गए एक शोध में पाया गया है. \n\n 'तुरंत ओर्गास्म, यानी बहुत जल्दी' मैंने उसे बस उस जगह लगाया और...और बस! मुझे इस से पहले ऐसा और इतनी जल्दी ओर्गास्म पहले कभी नहीं हुआ था. कभी भी नहीं.' जब एक कंपनी ने कभी ना वाइब्रेटर इस्तेमाल करनी वाली महिलाओं से कहा कि वो एक महीने वाइब्रेटर का इस्तेमाल करें, तो इस बात से सभी हैरान हो गईं. \n\n कुछ महिलाओं का कहना था की उन्हें यह सोच कर बुरा लग रहा था कि उतेजित होने के लिए और ओर्गास्म के लिए उन्हें अपने साथी की जगह वाइब्रेटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा था. उन्हें इस बात की भी चिंता थी कि सिर्फ एक बार के इस्तेमाल में ही उन्हें वाइब्रेटर की आदत पड़ जाएगी. \n\n 'मैं यह नहीं चाहती की मैं ऐसी हालत में पहुच जाऊं, जहां मैं असल सेक्स की जगह वाइब्रेटर की आदी हो जाऊं,' उनमें से एक ने कहा. पर कुछ महिलाओं के लिए, वाइब्रेटर के इस्तेमाल ने उन्हें आज़ाद महसूस कराया. इस टेस्ट से पहले, एक महिला ने कहा कि 'उसे लगा वाइब्रेटर उसकी तरह आम महिला के लिए नहीं बना है बल्कि उन महिलाओं के लिए जो 'सेक्स के लिए ज़्यादा पागल होती हैं.' पर वाइब्रेटर के साथ एक पागलपन वाला महीना बिताने के बाद, उसने अपने विचार बदल दिए: 'शायद मैं भी उन सेक्स के लिए ज़्यादा पागल महिलाओं में से एक हूं.' उसने कहा था. \n\n वाइब्रेटर की सच्चाई • वाइब्रेटर 1880 की शुरुआत में इजाद हुआ था और सबसे पहले वाला भाप से चलता था. • वाइब्रेटर का इस्तेमाल सबसे पहले मेडिकल ज़रूरत के तौर पर किया जाता था, उन महिलाओं पर जिनमें थोड़ा दिमागी पागलपन पाया जाता था. डॉक्टर उन्हें पेडू मसाज देते थे - और उन्हें वाइब्रेटर का इस्तेमाल आसान लगता था. • रिसर्च यह बताता है कि आधे से भी कम महिलाओं को संबंध बनाने के दौरान ओर्गास्म होता है, लेकिन वाइब्रेटर से 90 प्रतिशत महिलाओं को ओर्गास्म हुआ. \n\n

टेढ़ा है, पर....

'टेढ़ा है पर मेरा है' यह ऐड बना तो किसी और चीज के लिए था पर आदमी के अंग को लेकर भी सटीक बैठता है...
'टेढ़ा है पर मेरा है' यह ऐड बना तो किसी और चीज के लिए था पर आदमी के अंग को लेकर भी सटीक बैठता है. वैसे तो सामान्य टेढ़ापन प्रत्येक पुरुष के अंग में होता है, लेकिन कुछ बी‍मारियां जैसे पेरोनिस डिसीज अथवा कॉरडी आदि में पुरुष अंग में टेढ़ापन आ जाता है. \n\n पेरोनिस डिसीज में अंग में कार्टिलेज बनने लगते हैं. यह कार्टिलेज जिस जगह बनते हैं, उस जगह से अंग टेढ़ा होने लगता है. ऐसी दशा में उत्तेजित होने के बाद में प्रवेश कराने के प्रयास में अधिक दर्द होने लगता है. इससे अंग को प्रवेश कराने में कठिनाई आ सकती है तथा उसके तनाव में भी कमी आ सकती है. पर इन बीमारियों को छोड़कर अंग में पाए जाने वाले टेढ़ेपन से संबंध बनाने में कोई कठिनाई नहीं होती है. \n\n पहली बात तो यह तो यह कि अंग में मांसपेशियां नहीं होतीं, अत: उसमें कमजोरी नहीं आ सकती है. संबंध चाहे कितनी भी बार किया जाए, उससे अंग में कोई कमजोरी नहीं आती. दरअसल, अंग के अंदर कोई भी हड्डी अथवा मांसपेशी नहीं होती है, सिर्फ लचीले ऊतक होते हैं, जो खून के दौरे से फैलकर अंग की साइज (लंबाई और मोटाई) को बढ़ाते हैं. \n\n अत: अंग में तनाव आने के बावजूद थोड़ा-बहुत लचीलापन बना रहता है. इस लचीलेपन के कारण यह पार्टनर में प्रवेश कराते समय दाएं-बाएं अथवा ऊपर-नीचे की ओर फिसल सकता है. यही कारण है कि हाथ से पकड़कर प्रवेश कराने से यह काम आसान हो जाता है. \n\n मर्द और औरत की सेक्स करने के तरीके में भी फर्क है. मर्द एक बार चरम सुख पा लेने के बाद दूसरी बार उत्तेजित होने में समय लेता है. यह समय कुछ मिनटों से लेकर घंटों अथवा दिनों तक का भी हो सकता है. यह समय प्रत्येक मर्द में अलग-अलग होता है और विभिन्न हालातों में अलग-अलग हो सकता है. जबकि औरतों में ऐसा नहीं होता है, एक बार सुख मिलने के पश्चात फिर उत्तेजित करने पर औरत फिर से चरम सुख पा सकती है. \n\n अंग के आगे के हिस्से को ढंककर रखने वाली चमड़ी बहुत ही लचीली होती है. यह चमड़ी संबंध बनाते समय आसानी से पीछे हो जानी चाहिए. अंग इसके बाद ही पार्टनर में प्रवेश कर पाता है. अगर यह चमड़ी बहुत कसी हुई हो एवं आसानी से पीछे नहीं होती हो, तो कठिनाई होती है. संबंध नहीं भी बन सकता है. ऐसे में अगर जबरदस्ती प्रयास किया जाए तो ऊपर की चमड़ी फट सकती है, खून निकल सकता है तथा अधिक दर्द हो सकता है. बेहतर है फिर किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह व इलाज कराएं. \n\n

साइज का भरम और शरीर सुख

किसी के तन को चाहना और उसे पाकर संतुष्ट हो जाना होना और चरम सुख पाना एक पेचीदा मामला है. अमूमन लोग इस बारे में नहीं जानते आदमी और औरत के शारीरिक संबंधों में शरीर की बनावट का खास महत्त्व नहीं है. मन की भूमिका इसमें ज्यादा होती है....
"आदमी और औरत के शारीरिक संबंधों में शरीर की बनावट का खास महत्त्व नहीं है. मन की भूमिका इसमें ज्यादा होती है. यही वजह है कि दुनिया के खूबसूरत से खूबसूरत मर्द और सुंदर से सुंदर और को भी तन का सबसे अधिक सुख उसी से मिलता है, जिसे वह प्यार करती है. \n\n इसीलिए भारतीय गंवई इलाकों में जहां सेक्स की पढ़ाई नहीं होती और इस बारे में बात करना भी शर्मनाक समझा जाता है वहां शारीरिक अंगों की बनावट को लेकर काफी भ्रम है, खासकर लड़के आपस में भी अपने अंगों की साइज को लेकर हंसी मजाक और बड़बोलापन करते रहते हैं. \n\n पर मेडिकल साइंस के सामने अभी तक इस बात का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि बड़े अंग वाले मर्द को शारीरिक संबंध बनाने के दौरान में ज़्यादा मज़ा आता है, याफिर उसकी साइज से उसकी पार्टनर को संबंध बनाए जाने के दौरान ज़्यादा मज़ा आता है. अभी तक इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि अगर अंग अधिक लंबा है तो वह किसी महिला के अंगो को बेहतर तरीके से उत्तेजित करके उसे पूरी तरह से संतुष्ट करने में सक्षम ही होगा. \n\n सच तो यह है कि महिला पार्टनर इस बात पर इतना ध्यान देती भी नहीं हैं, इसकी वजह है उनके शरीर की बनावट. महिलाओं का सबसे खास अंग, जिसका ताल्लुक उसकी शारीरिक संतुष्टि से होता है, का आकार और बनावट हर एक महिला का दूसरी महिला से अलग होता है. इस हिसाब से पुरुषों के अंग के आकार में शिथिल अवस्था में इतना अधिक अंतर नहीं होता है. \n\n यही वजह है कि महिलाओं की तुलना में सभी पुरूषों में ऑर्गेज्म बहुत कम समय का होता है और यह जल्दी आ जाता है जबकि महिलाओं को उस स्टेज तक पहुंचने में थोड़ा अधिक समय लगता है. एक बेहतर ऑर्गेज्म ना सिर्फ सेक्स के लिए बेहतर है, बल्कि यह शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है. इसलिए इन बातों से अलग हट कर अपने पार्टनर के साथ ही खुश रहें और उसे ढेर सारा प्यार दें \n\n"

समस्या बिस्तर पर हो तो शरमाएं नहीं

किसी के तन को चाहना और उसे पाकर संतुष्ट हो जाना होना और चरम सुख पाना एक पेचीदा मामला है. अमूमन लोग इस बारे में नहीं जानते और जब कोई शारीरिक दिक्कत होती है...
"किसी के तन को चाहना और उसे पाकर संतुष्ट हो जाना होना और चरम सुख पाना एक पेचीदा मामला है. अमूमन लोग इस बारे में नहीं जानते और जब कोई शारीरिक दिक्कत होती है, तो नीम हकीम के पास जाकर फंस जाते हैं. हमें यह जानना चाहिए कि संबंध बनाने के दौरान जब शरीर बेहद उत्तेजना में होता है, तो तन मन दोनों भले ही एक साथ जुड़े हों पर उनकी मानसिक और शारीरिक दशा तन-मन के अलग-अलग अंगों से जुड़ी होती हैं. इन्हें जाने बगैर आदमी और औरत एक दूसरे को चरम सुख की दशा में नहीं ले जा सकते. \n\n केवल शारीरिक संबंध बनाना और अपने पार्टनर को चरम सुख पहुंचाना, दोनों ही मन की दशा पर तय करता है. एक जाने माने सेक्स जानकार का कहना है कि वैसे तो जवानी के दिनों में पुरुषों के अंग में तनाव, जल्दी पतन और महिलाओं का शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं हो पाना जैसी सेक्स-समस्याओं के लिए आमतौर पर मानसिक कारण ही ज़िम्मेदार होते हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं है कि गड़बड़ हमेशा दिमाग में ही हो. \n\n पुरुषों के शारीरिक संतुष्टि की बात करें तो बात उतनी शारीरिक नहीं है, जितनी लगती है. यह सीधे-सीधे दिमाग के नर्वस सिस्टम से जुडी है. पुरुषों के लिए ओर्गास्म का मतलब है अंग का संबंध बनाने के लिए तैयार होना और उसका संतुष्ट होना. लेकिन यह दोनों बातें तभी होंगी जब नर्वस सिस्टम के दोनों हिस्से पूरी तरह से संतुलित हों. नर्वस सिस्टम ही है जिसकी बदौलत हमारे शरीर में कई हरकतें अपने आप होती रहती हैं, जैसे दिल के धड़कने से लेकर अंग के सख्त होने तक. \n\n मेडिकल की भाषा में बात करें तो नर्वस सिस्टम की दो शाखाएं प्रमुख हैं: एक है अनुकंपी तंत्रिका तंत्र: यह 'फ्लाइट और फाइट' करने वाली शरीर की सारी हरकतों को चलाता या उसपर काबू करता, जैसे दिल का तेज़ धड़कना, ब्लड प्रेशर का बढ़ना और शरीर का संबंध बनाने के लिए तैयार होना. \n\n दूसरी होती है, परानुकंपी तंत्रिका तंत्र: यह आराम और पाचन से जुड़े कामों और शरीर की हरकतों, जरूरतों को अंजाम देता है, उसपर काबू करता है, जैसे शरीर का आराम करना और दिल की धड़कनो का धीरे धड़कना. \n\n एक स्टडी से पता चला है कि जिन मर्दों को जल्दी पतन की समस्या होती है, या जिन्हें जवानी के दिनों में भी संबंध बनाने में दिक्कत होती है उसका कारण इन दोनों शाखाओं का आपस में संतुलन नहीं होना होता है. इसके लिए जरूरी है कि दिमाग को हमबिस्तर होने के दौरान वहीं रखें, इधर-उधर भटकाएं नहीं. ज्यादा दिक्कत हो तो अपने पार्टनर को भी बताएं और न हो तो किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें. नीम-हकीमों के चक्कर में न पड़ें. \n\n"

सभी करते हैं फिर डर कैसा

शरीर के संबंधों को लेकर एक इनसान को छोड़ दिया जाए ,तो बाकी जीव बिंदास जीते हैं और ज्यादातर यह काम अमने लिए तय मौसम में ठीक समय पर करते हैं...
शरीर के संबंधों को लेकर एक इनसान को छोड़ दिया जाए, तो बाकी जीव बिंदास जीते हैं और ज्यादातर यह काम अमने लिए तय मौसम में ठीक समय पर करते हैं. ज्यादातर का यह संबंध उनकी जमात बढ़ाने के लिए होता है. आदमी और औरत चूंकि अपने शारीरिक संबंधों को अपने हिसाब से चलाते हैं, इसलिए उनके मन में इसे लेकर अधिक लालसा, डर और भ्रम भी बना रहता है. डर इनमें सबसे बड़ा कारण है. खासकर सेक्स शिक्षा के अभाव में वे संबंध बनाने के दौरान होने वाले दर्द के डर से शुरू-शुरू में इसे इंज्वॉय नहीं कर पातीं. \n\n आइए जानें कुछ ऐसे तरीके जिनसे संबंध बनाने के दौरान होने वाले दर्द को कम किया जा सकता है. कई बार महिलाओं के मन में इंटरकोर्स के प्रति डर रहता है. इस डर के कारण सेक्स के दौरान प्राइवेट पार्ट में जो गीलापन होना चाहिए, वह नहीं हो पाता. इस समस्या से निबटने का सबसे आसान तरीका है डर पर काबू पाना. ऐसे में अपने पार्टनर से बातचीत करें और उनका सहयोग दें. \n\n उन्हें रोमांटिक बातों में उलझाएं, कोई फिल्म दिखाएं, इस तरह की किताब पढ़ने को दें, और याद रखें कि यह सब बिना किसी दबाव के सहज ढंग से करें. उनका मन जीतें, फिर भरोसा, ताकि वह खुल जाएं. फिर तन तो आपका हैअ ही. आप यह जानने की कोशिश करें कि अगर संबंध बनाने में अधिक दर्द हो रहा है तो कुछ समय तक ओरल सेक्स, मसाज या साथ नहाने के दौरान मन का डर निकलवाकर आनंद लिया जा सकता है. \n\n संबंध बनाने से पहले फोरप्ले करना सेक्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मददगार होता है. अगर दर्द होता है तो यह जरूरी है कि धीरे-धीरे प्यर संबंध बनाएं. इस दौरान दर्द की एक खास वजह सूखेपन को भी माना जाता है, तो इसके लिए लुब्रिकेंट्स का इस्तेमाल करना चाहिए. लुब्रिकेंट्स के इस्तेमाल से संबंध बनाने के दौरान होने वाले दर्द को कम किया जा सकता है. \n\n ध्यान रखें बिना रुकावट के लंबे समय तक बिस्तर सुख लेने के लिए प्राइवेट पार्ट्स को साफ रखना भी बेहद जरूरी है, इससे इंफेक्शन और एसटीडी रोगों से बचा जा सकता है. अगर इन सुझाओं को अपनाने के बावजूद शारीरिक संबंध बनाने के दौरान दर्द रहता है, तो इसे नजरअंदाज करने की जगह डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. \n\n

जब संबंध बनाने में हो दर्द

शारीरिक संबंध बनाना सभी सभी के लिए हमेशा एक सुखद अनुभव नहीं होता है. पहली बार किया गया सेक्स संबंध अगर समझदारी से अंजाम न दिया गया हो तो अकसर पीड़ादायक होता है...
शारीरिक संबंध बनाना सभी सभी के लिए हमेशा एक सुखद अनुभव नहीं होता है. पहली बार किया गया सेक्स संबंध अगर समझदारी से अंजाम न दिया गया हो तो अकसर पीड़ादायक होता है. इसके लिए वैसे तो मर्द की हड़बड़ी जिम्मेदार है और गंवई इलाकों में प्रचलित यह भावना कि सुहागरात के दिन अगर बिस्तर पर न जीते, तो जीवन भर बीवी हिकारत की नजर से देखेगी. \n\n दिक्कत यह है कि इसी कुविचार के चलते अब भी गंवई इलाका तो क्या शहरों के भी कम समझदार लोग पहले दिन ही शादी के बाद अपनी मर्दानगी झाड़ने के चक्कर में औरत के ऊपर जंगली की तरह टूट पड़ते हैं. और यह भी ध्यान नहीं रखते कि इसका उनकी साथी के शरीर और मन पर क्या असर पड़ेगा. \n\n आज के दौर के युवाओं में इस विषय को लेकर जागरूकता का होना बहुत जरूरी है कि किसी औरत से संबंध बनाने के लिए पहले उसे मानसिक तौर पर तैयार करना ज्यादा जरूरी है. दुनियाभर में हनीमून मनाने की परंपरा इसीलिए है कि नए घर और माहौल में आई औरत अपने मर्द को धीरे-धीरे पहचान कर पहले मन से उसकी करीबी बने और फिर तन से सुख पाए और पहुंचाए. \n\n इसलिए इस तरह से संबंध बनाने वाले लोग यह जान लें कि अगर आपके पार्टनर को एक से अधिक बार शारीरिक संबंध बनाने के बाद भी दर्द जारी रहता है तोयह दोनों के लिए चिंता की बात हो सकती है. ऐसे मामलों में पार्टनर के कहने को तुरंत मान लें और एक-दो दिन बाद जब उसका मूड ठीक हो और वह मानसिक, शारीरिक दोनों ही तौर पर तैयार हो तभी संबंध बनाएं. कई बार इंटरकोर्स के दौरान औरतों और मर्दों दोनों को दर्द होता है. ऐसे में यह जानना जरूरी हैकि इंटरकोर्स के दौरान दर्द होता क्यों है? \n\n सच तो यह है कि पहली बार संबंध बनाने के दौरान दर्द होना आम बात है. पहली बार इंटरकोर्स के दौरान महिलाओं की झिल्ली के फ़टने के कारण उनके निचलेहिस्से में दर्द होता है, वहीं मर्दों के प्राइवेट पार्ट की स्किन के खिंचने के कारण ऐसा हो सकता है. \n\n साथ ही पहली बार संबंध बनाते समय तनाव या टेंशन के कारण या निचले हिस्से में सूखेपन के कारण भी दर्द भी हो सकता है. इसके अलावा महिला के खास अंगमें सूजन होना, गर्भनिरोधक गोलियां लेना या किसी बीमारी के कारण भी यह दर्द हो सकता है. मर्दों को संबंध बनाने के दौरान अगर प्राइवेट पार्ट में दर्द होता है जोइसका कारण कोई इंफेक्शन या बीमारी हो सकती है. इसलिए सबसे जरूरी यह है कि पहले अपने तन का हाल जान लें फिर संबंध बनाने की सोचें. यह बिल्कुल ताली की तरह है, जो एक हाथ से तो बजने से रही. \n\n

जी-स्पॉट यानी चरम सुख

अगर आपकी सेक्स लाइफ अच्छी नहीं चल रही या आप चाह कर भी सेक्स के दौरान चरम सुख तक नहीं पहुंच पा रहे हैं तो कुछ नया ट्राई करें....
अगर आपकी सेक्स लाइफ अच्छी नहीं चल रही या आप चाह कर भी सेक्स के दौरान चरम सुख तक नहीं पहुंच पा रहे हैं तो कुछ नया ट्राई करें. पहले यह जान लें कि इसमें जी-स्पॉट की अपनी भूमिका है, पर यह जी-स्पॉट है क्या? यह कहां होता है और उसे कैसे उत्तेजित किया जाता है? चरमसीमा के वक्त इसे कैसे खोजा जाता है? क्या मर्दों की तरह औरतें भी सुख से गीली होती हैं? ऐसे कई सवाल है जो अभी भी कई पुरुषों के लिए एक अबूझ पहेली ही हैं. \n\n 'जी-स्पॉट' को ग्राफेनबर्ग-स्पॉट कहते हैं, जो महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में एक ऐसी जगह होती है, जहां सबसे ज्यादा सेंसिटिविटी होती है. इसे सहलाने से महिलाओं को संबंध बनाने के दौरान चरम सुख का आनंद मिलता है. यह महिलाओं के अंदरुनी अंग की दीवार के ऊपरी हिस्से में करीब डेढ़ या दो इंच की गहराई पर होता है. \n\n उत्तेजना बढ़ने पर यह 'जी-स्पॉट' एक छोटी-सी गांठ की तरह फूल कर थोड़ी कठोर भी हो जाती है. जी-स्पॉट के साथ-साथ अगर उससे लगे हिस्से को भी सहलाया जाए तो औरत को ज्यादा आनंद और उत्तेजना का अहसास होता है. कहा जाता है कि संबंध के दौरान क्लाइमेक्स के वक्त औरतें पुरुषों की तरह स्खलित नहीं होतीं बल्कि चरम-सीमा के वक्त उनको यह अहसास होता है कि 'बस अब और नहीं'. ज्यादातर औरतों को प्राइवेट पार्ट में सिकुड़न का भी अहसास होता है. \n\n औरतों को चरमसुख पाने में समय लगता है, और थोड़ा अभ्यास भी. महिलाओं का जी स्पॉट हमेशा से ही चर्चा में रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं मर्दों का भी जी स्पॉट होता है. पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड्स को जी स्पॉट के रूप में जाना जाता है. यह ग्लैंड ऐसे फ्लुइड्स को निकालता है जो स्पर्म को तैरने में मदद करता है. मर्द के अंग से जुड़ा हिस्सा, जिसका उपयोग कभी भी मर्दों को समझ नहीं आता, वही पुरुषों का जी-स्पॉट होता है, जिसे छूने से उसके अंदर उत्तेजना पैदा होती है. \n\n हालांकि शारीरिक संबंधों के जानकारों के बीच इस बात पर अभी तक बहस जारी है कि जी-स्पॉट सच में होता है या नहीं. लेकिन एक बात यह भी सच है कि जिस मुद्रा में एक महिला के अंग की ऊपरी सतह उत्तेजित होती है, उसमे उसके चरम सुख पाने की संभावना अधिक है. शायद इसीलिए दुनिया भर में हमबिस्तर होने की एक ही स्टाइल सबसे अधिक चलन में है. तो घबराएं नहीं, आजमाएं. \n\n

आजमाइए ये पॉवरबूस्टर फूड

क्या आप जानते हैं कि आप अपने दैनिक जीवन के फूड और खाने की हैबिट से भी अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बना सकते हैं..
"क्या आप जानते हैं कि आप अपने दैनिक जीवन के फूड और खाने की हैबिट से भी अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बना सकते हैं? यहां तक कि इन चीजों के सेवन से आप जवानी की धेर सारी कमजोरियों पर भी काबू पा सकते हैं. इसलिए हम जिन चीजों को बता रहे उन्हें अपने खान-पान में आप जरूर शामिल करें और अपनी ताकत के साथ ही अपनी बेड लाइफ को भी बेहतर बनाएं. \n\n शहद : सेक्स ड्राइव बढाने में शहद अच्छा खासा योगदान करता है. फारसी कहावत के अनुसार कोई भी जो़डा लगातार तीस दिनों तक शहद और पानी का सेवन करता है, तो उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय होता है, इस मान्यता के पीछे साइंटिफिक फैक्ट यह है कि शहद में हाई क्वालिटी वाले अमीनो-एसिड और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जो जोड़े को लंबे समय तक की हमबिस्तरी के लिए ठीकठाक एनर्जी और ताकत मुहैया कराते हैं. इसीलिए इनसे आपकी बेड लाइफ बेहतर बनती है. \n\n अदरक : कहते हैं कि भारतीय मसालों में बहुत सारे ऎसे हैं जो कि सेक्स ड्राइव को बढाने में मददगार होते हैं. अदरक भी उनमें से एक है. अदरक दवा के रूप में भी कई रोगों का खात्मा करता है. अदरक से सिर्फ चाय या सब्जी का जायका ही नहीं बढ़ता बल्कि अदरक संबंध बनाने के लिए बढ़ावा भी देता है और उकसाता भी है. इसकी तीखी खुशबू और स्वाद का जवानी से सीधा रिश्ता है. इसमें मौजूद केमिकल आदमी के भीतर खून की गति को भी बढ़ावा देते हैं. इसीलिए इसे हर लिहाज से बेहतर सेक्स को बढ़ावा देने वाला माना जाता है. \n\n गाजर : गाजर से आदमी की सेक्स की क्षमता बढ़ती है. माना जाता है गाजर में मौजूद विटामिन्स मर्दो की नशों में ब्लड का सर्कुलेशन बढ़ा उसकी ताकत को मजबूत बनाता है और जवानी की तेजी को बढ़ाता है. \n\n सरसो : कई रिसर्च ये साबित कर चुके है की सरसो सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में भी मददगार है. सरसो के सेवन से मर्दो में हमबिस्तरी की भावना बढ़ती है. यानि सरसो मर्दो में यौन इच्छा को बढाती है. सालों से सरसो को सेक्सुअल भाग के लिए लाभकारी माना जा रहा. \n\n तो ले आइए आज ही हमारी बताई हुई खाने की इन चीजों को और बढ़ाइए अपनी सेक्स की चाह को.\n\n"

इट्स नॉट टू मिनट नूडल्‍स

जिस बात से धरती पर आए हर जीव क पाला है ,उसे लेकर बात करने में लोग हिचकिचाते क्यों हैं समझना मुश्किल है...
जिस बात से धरती पर आए हर जीव क पाला है, उसे लेकर बात करने में लोग हिचकिचाते क्यों हैं समझना मुश्किल है...

वर्जिनिटी टेस्ट, बेकार की सनक

कुंवारेपन को लेकर अभी भी गंवई समाज में ढेर सारी गलतफहमियां हैं. किसी लड़की ने कभी किसी के साथ रिश्ता बनाया है या नहीं...
कुंवारेपन को लेकर अभी भी गंवई समाज में ढेर सारी गलतफहमियां हैं. किसी लड़की ने कभी किसी के साथ रिश्ता बनाया है या नहीं, संभोग या सेक्स किया है या नहीं, मगर उसकी पुष्टि कैसे हो सकती है. ऐसा माना जाता है कि महिलाओं के कुंआरेपन की परख उनके हायमन या कौमार्य झिल्ली के फटने या ब्रेक न होने से की जा सकती है. \n\n पर यह केवल गलतफहमी है. सच तो यह है कि एक लड़की, जिसने पहले कभी सेक्स न किया हो तो भी उसका हाइमन टूट या ब्रेक हो सकता है. वर्जिनिटी यानी कुंआरापन कई दूसरी वजहों से भी टूट सकता है, जैसे खेलने-कूदने से, लंबे समय तक साइकिलिंग करने या माहवारी के दिनों में टैम्पून आदि का इस्तेमाल करने से. \n\n वैज्ञानिक तरीके से भी ऐसा कोई उपाय नहीं जिससे पता लग सके कि कोई लड़की पहले सेक्स कर चुकी है या नहीं. अगर वह कहती है कि उसने पहले कभी सेक्स नहीं किया, तो भी पहली रात में खून निकलना जरूरी नहीं. हरेक लड़की में हाइमन साबुत ही हो, यह भी जरूरी नहीं. भरोसा ही एकलौती चीज है और जीवन में उसी के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए. अगर लड़की कहती है कि उसने पहले कभी सेक्स नहीं किया है, तो मान लेना चाहिए कि वह सच ही कह रही होगी. \n\n चेस्टिटी और वर्जिनिटी के बारे में फैली धारणाओं को साफ करना जरूरी है. कई ऐसे कुंवारे होते हैं, जो शुद्ध नहीं हैं. दूसरी ओर ऐसे शुद्ध लोगों की भी कमी नहीं है जो कुंवारे नहीं हैं. बहुत-से लोग पहले सेक्स नहीं करते, पर अपने पार्टनर से सिर्फ किसिंग या हगिंग आदि से ही संतोष कर लेते हैं, पर जिनको सेक्स के पहले प्रयास के दौरान खून आता है, उन्हें लोग कुंवारा मानते हैं. \n\n शायद आपको पता नहीं कि अगर लड़की को झूठ ही बोलना हो तो आजकल ऐसे ऑपरेशन भी होते हैं, जिनमें प्लास्टिक सर्जरी के जरिए हायमन को रिपेयर कर लिया जाता है. कई बार हाइमनोप्लास्टी करके नया हाइमन भी लगाया या रीकंस्ट्रक्ट कर दिया जाता है, उससे भी असलियत का पता नहीं चलता. पर अगर कोई महिला ऐसा न भी करवाकर यह कहे कि उसने पहले कभी सेक्स नहीं किया है, तो बात वहीं खत्म हो जानी चाहिए. \n\n

सेक्स इन द मॉर्निंग

रोहित और मीता नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करते हैं. कई बार शाम की शिफ्ट से घर लौटने के बाद दोनों थक कर सो जाते.
रोहित और मीता नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करते हैं. कई बार शाम की शिफ्ट से घर लौटने के बाद दोनों थक कर सो जाते. रोहित भले ही सवेरे सवेरे सेक्स के लिए पहल करता था पर मीता को नींद प्यारी होती. मगर रोहित ने प्यार मनुहार से एकदिन मीता को मना ही लिया. \n\n और उस दिन के बाद मीता की मानें तो,मैंने तो अब इसे ही अपना रूटीन बना लिया है. यानी जिस दिन भी मन हो वक्त सवेरे का ही ठीक है. सच कहूं तो सुबह सवेरे सेक्स का मजा ही कुछ और है. दिन भर ताजगी सी रहती है. चेहरे की भी चमक बढ़ सी गई है. काम में मन भी लगता है. पहले की वह थकान भी न जाने कहीं गुम है. मैं अब कुछ ज्यादा रोमांटिक भी हो गई हूं. \n\n मर्द और औरतें इस बात को लेकर कनफ्यूज रहते हैं कि हमबिस्तरी करने के लिए कौन सा समय अच्छा रहेगा. आज हम इस कनफ्यूजन को दूर कर देंगे. कई डॉक्टर सेक्स से जुड़े जिन शारीरिक फायदे को बताते हैं, उसमें सुबह के वक्त संबंध बनाने को भी शामिल करते हैं. सेक्स करने के समय से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक सुबह का वक्त सेक्स करने के लिए सबसे बेहतर समय है. \n\n मुझे तो मार्निंग सेक्स करने में मजा आता है. लोग शादी की पहली सुहागरात मनाते हैं, मैंने तो सुहाग सुबह मनाई थी. हम दोनों मियां बीवी मॉर्निंग सेक्स ज्यादा एंजॉय करते हैं कहना था एक नामी बैंक में कार्यरत सुधीर का. \n\n रिसर्च में पता चला है कि सुबह सेक्स करने के ढेरो फायदे हैं. सुबह के समय अगर सेक्स करते हैं तो पूरे दिन आप खुश और टेंशन फ्री महसूस करते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, सेक्स के दौरान निकलने वाले कैमिकल के कारण आपका मूड बेहतर रहता है और दिनभर चुस्ती फुर्ती बनी रहती है. सुबह सेक्स करने से कई तरह की बीमारियां खुद ही दूर हो जाती हैं. \n\n इसके अलावा सेक्स के दौरान इम्यूनोग्लोबिन ए से आपकी इम्युनिटी 30 परसेंट तक और बढ़ती है. रेगुलर सेहतमंद सेक्स से आप वजन भी कम कर सकते हैं. सेक्स करने से बहुत उर्जा बर्न होती है, जिससे आपका वजन कम हो जाता है. जैसे लोग सुबह योग व्यायाम करते हैं ठीक वैसे. \n\n सिडनी की कई रिसर्च में यह सामने आया है कि सुबह के समय सेक्स से वीर्य की क्वालिटी 12 परसेंट से 15 परसेंट तक बढ़ जाती है . \n\n इससे परिवार बढ़ाने की शुरूआत बेहतर हो सकती है. सुबह सेक्स करने से आपकी त्वचा भी चमकती है. एस्ट्रोजन का स्तर बेहतर होने से ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है. स्किन और बालों की क्वालिटी अच्छी होती है. \n\n

किस करें और यंग रहें

जानिए किस सिर्फ फन के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि फिट रहने के लिए भी किस करना बहुत जरूरी है
जानिए किस सिर्फ फन के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि फिट रहने के लिए भी किस करना बहुत जरूरी है. किस करने और स्मूच करने के स्वास्थ्य संबंधी बहुत से फायदे हैं. आइए जानें, रोजाना किस करके आप कैसे तंदुरुस्त रह सकते हैं. \n\n एक रिसर्च की माने तो जो कपल सुबह 5 मिनट गुडबाय किस करते हैं वो नार्मल लोगों से 5 साल ज्यादा जीते हैं.अगर आप रोजाना अपने पार्टनर को सीरियस फ्रेंच किस करते हैं. तो आपके मुंह के बैक्टीरिया दूर होंग. \n\n इतना ही नहीं, इससे आप दांतों की बीमारी, कैवेटिज वगैरह से आसानी से बच सकते हैं. क्या आप जानते हैं स्मूच करने से तनाव को दूर करने में बहुत मदद मिलती है. ये एक तरह का मेडीटेशन है. ये नेगेटिव सोच को दूर करता है और आपको खुश रखने में मदद करता है. \n\n किसिंग से आप एलर्जी को गुडबॉय कह सकते हैं. एक जैपनीज स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ था कि 30 मिनट तक लगातार किस करने से शरीर में सीजनल एलर्जी बढ़ाने वाले बैक्‍टीरिय कम हो जाते हैं. किसिंग से मेटाबॉलिज्म स्ट्रांग होता है. \n\n क्या आप जानते हैं पैशनेट होकर किस करने से आप एक मिनट में 2 से 5 कैलोरी बर्न करते हैं. ये आपके नॉर्मल रूटीन में होने वाली बर्न कैलोरी से डबल है और इससे आपको खूब आनंद भी मिलेगा. \n\n

गरमियों में ऐसे बनाएं प्यार के संबंध

गरमियों में प्यार के टिप्स * गरमियों में बिना नहाए जीने की कल्पना भी मुश्किल है. फिर अगर आप युवा हैं ,तो तालाब ,नदी या फिर स्वीमिंग पुल
"गरमियों में प्यार के टिप्स * गरमियों में बिना नहाए जीने की कल्पना भी मुश्किल है. फिर अगर आप युवा हैं, तो तालाब, नदी या फिर स्वीमिंग पुल का मजा न लेते हों, ऐसा हो ही नहीं सकता. नदी, तालाब और स्वीमिंग पूल चूंकि पब्लिक प्लेस है, इसलिए वहां आपको प्यार करने की इजाजत तो नहीं दी जा सकती पर भीषण गर्मी में भी आप अपने पार्टनर के साथ इन जगहों पर जा तो सकते ही हैं\n\n * याद रखें, नदी, तालाब और स्वीमिंग पूल में स्नान के बाद की ताजगी आपके पार्टनर को कूल होकर आपसे संबंध बनाने के लिए उकसा देगी, बशर्ते की आप इसका इशारा पहले ही कर चुके हों. अगर आप नजरें बचाकर अपनी पार्टनर को छेड़ दें तो उसका मन और भी उत्साहित हो जाएगा. औरतों को अपने प्रेमियों की यह हरकतें बेहद पसंद आती हैं, बशर्ते आप पति बनने के बाद भी उनके प्रेमी बने रहें \n\n * गरमी के कारण न केवल आपका शरीर जलता है बल्कि अगर एसी न हो तो, आपके बेड रूम में लगा बिस्तर भी गरम हो जाता है. तो इस गरमी में आप अपने साथी को लेकर फ्लोर पर ही लेट जायें. ऐसा करना आपके वाइल्ड होने का संकेत तो करायेगा ही साथ ही पार्टनर का मूड भी बन गया तो भोर की हवा में आपका आनंद भी दोगुना हो जाएगा. \n\n * हर पल जब आप चाहें बारिश तो नहीं हो सकती है, लेकिन आप इस अहसास को शॉवर के जरिए अपने बीच जिंदा कर सकतें है, अपने साथी को बड़े ही प्यार से बाथरूम में लेकर जायें और एकसाथ शॉवर के नीचे खड़े हों, इस दौरान अपने साथी के कपड़ों निकालने में उसकी मदद के साथ ही उसे अपने प्यार का अहसास करायें, तय है आप दोनों ही खुश हो जाएंगे\n\n * सुबह की शुरुआत से पहले साथी का ऊड सही कर दिन की शुरुआत एक बेहतर अंदाज से हो जाए, इससे ज्यादा और क्या चाह सकते हैं आप भला, विशेषज्ञों की माने तो सुबह 5 से 6 बजे के बीच बनाया गया शारिरिक संबंध आपको न केवल भरपूर मजा और काफी सुकून देगा, बल्कि लंबे समय तक तृप्त भी रखेगा. \n\n * अगर जेब इजाजत दे तो गर्मियों के दिनों सैर-सपाटे की आदत डालें. अपने शहर से दूर चाहे बर्फीली वादियों, किसी हिल स्टेशन या समंदर किनारे के टूर पर जाएं. ऐसी जगहों पर बनाया गया संबंध आजीवन आपकी शारीरिक फैंटेसी को जिन्दा रखने का काम करेगी \n\n ."

तरीके, जिन्हें जानना युवाओं के लिए जरूरी

पार्टनर को प्यार करना किसी भी रिश्ते की जान है ,पर हमारे यहां प्यार करने को लेकर एक अजीब सी झिझक या शर्म का माहौल है.
"पार्टनर को प्यार करना किसी भी रिश्ते की जान है, पर हमारे यहां प्यार करने को लेकर एक अजीब सी झिझक या शर्म का माहौल है. खजुराहो और कामसूत्र के देश में यह हिचक कब से आई, समझना काफी मुश्किल है. इतनी किताबें, इतने सारे ग्रंथ होने के बावजूद, हम अपने युवाओं को वह सब जानकारी नहीं देते जो उन्हें अपने पार्टनर से संबंध बनाते समय होनी चाहिए. गांवों तो क्या शहरों तक में इस विषय को लेकर ढेरों रिश्ते और जिन्दगियां दावं पर लगी होती हैं\n\n जबकि शारीक संबंध बनाना सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. आइए बातें करते हैं, इसके फायदों के बारे में - • चाहे थकान भले दोनों में हो पर अगर किसी का मन है तो पहल तो किसी दूसरे को करनी ही होगी. याद रखें कि एक बार संबंध बनाने के बाद यह थकान भी दूर हो जाएगी और बहुत बार तो आप पहले से तरोताजा महसूस करेंगे. • कमरे का माहौल खुशनुमा रखें. किसी रूम फ्रेशनर या खूशबूदार फूलों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं • धीमे स्वर में संगीत बजाना भी माहौल में चार चांद लगा देगा. पर याद रखें गीत रोमांटिक ही हो, भजन या विरह गीत उल्टा असर करेगा • रोमांटिक बातों, चुंबन, आलिंगन से धीरे-धीरे शुरूआत करें. • कोई भी पहल करते हुए एकदूसरे के कान व गले के निचले भाग, सीने, कमर व नाभि, जांघ आदि को सहलाएं या चूमें. • हो सके तो कामासूत्र के नए तरीकों का भी मजा लें. • कभी कभार हनी, चाकलेट, आईस का उपयोग भी अपने संबंध बनाने के दौरान करें. • साथ में नहाते हुए प्यार व संबंध बनाने का मजा ही कुछ और है, तो अगर आपके पास जगह और मौका हो तो इसे भी आजमाएं. • इस मधुर पल में स्मार्टफोन जरूर साइलेंट मोड पर रख दें. • संबंध बनाने के फौरन बाद कपड़े पहनने की जल्दबाजी न करें, बिना कपड़ों में सोने का मजा ही कुछ और है. बस इन टिप्स का मंत्र अपनाकर आप अपनी लाइफ में इन्जायमेंट का असर दोगुना कर सकते हैं. तो हैप्पी मजेदार लाइफ!"

प्यार में आइस का उपयोग

गर्मियां चरम पर हैं और गर्मियों में सेक्स करना कभी-कभी बेहद ही परेशानी का सबब बन जाता है. सर्दियों में जिस...
गर्मियां चरम पर हैं और गर्मियों में सेक्स करना कभी-कभी बेहद ही परेशानी का सबब बन जाता है. सर्दियों में जिस तरह खुशगवार मौसम में आप रजाई में बेहतर सेक्स का मजा लेतें थे अआसर गर्मियों में वही मजा एक सजा बन जाती है.पर अगर थोड़ी सी जानकारी और समझदारी रखी जाए, तो कोई भी मौसम आपके मजे को कम नहीं कर सकता. \n\n कविता का पहले गरमियों में बुरा हाल हो जाता था. जब भी पति कुछ कहता, वह काट खाने को दौड़ती. पर जब भी वह पड़ोस की मीनू को देखती, तो वह हर दिन सवेरे बाल खोले, खिली-खिली सी दिखती. उसमे जरा भी आलसपन नहीं दिखता. एक दिन उसने मीनू से उसकी खुशी का राज पूछा, तो उसने बताया कि अभी वह युवा है, इसलिए उसे रोज ही अपने पति की बाहों में जाना पड़ता है. \n\n इतनी गरमी में वह यह काम कैसे कर लेती है, उस पर उसने अपने अनुभवों के साथ-साथ वह बातें भी बताईं, जो उसने कई महिलाओं एवं उनके द्वारा अपने पुरुषों से की गई बातचीत से हासिल किए थे. आइए, गर्मियों में प्यार या सेक्स करने का एक तरीका हम बताते हैं. तो जानिए वह नया अंदाज, जिससे आप भी गर्मियों में अपनी सेक्स लाइफ को इंटरेस्टिंग और यादगार बना सकते हैं. यह और बात है कि यह तरीका यादगार रखना है, तो इसे रोज न आजमाएं\n\n आइस आइस बेबी, कूल-कूल पार्टनर यह तो आप जानते ही हैं कि गर्मियों में आइस- आइस कूल-कूल का कितना आनंद है. गरमी में बर्फ एक ऐसी चीज होती है जिसे देखने मात्र से ही सुकून का एहसास होता है. आइस क्यूब को केवल अपने ड्रींक को चील्ड करने तक ही सीमित न रखें, क्योंकि यह आपको भले ही कूल-कूल करे, पर आपकी सेक्स लाइफ को बेहद हॉट बना सकता है. \n\n आपको करना बस यह है कि अपने होठों में आइस क्यूब को दबाकर अपने पार्टनर के शरीर पर रगड़े. वहां-वहां जहां उन्हें जलन न हो.यकीन मानिए आपकी इस अदा पर न केवल आपके पार्टनर फिदा हो जाएंगे बल्कि जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए आपसे लिपट जाएंगे. लो हो गया आपका काम, गरमी बेचारी फिर क्या करेगी. पर उम्दा तो यह होगा कि पार्टनर के साथ-साथ अपनी खुशी के लिए भी आप आइस के इस प्रयोग के बाद आइसक्रीम खा लें. हम सच कहते हैं, आपका आनंद दोगुना हो जाएगा\n\n

हमबिस्तरी के फायदे कम तो नहीं

संजना को अपने पति से एक शिकायत थी. दो बच्चों के बाद भी जब देखो तब वे उससे चिपक जाते थे. पहले तो वह इसे पति...
संजना को अपने पति से एक शिकायत थी. दो बच्चों के बाद भी जब देखो तब वे उससे चिपक जाते थे. पहले तो वह इसे पति की इच्छा मानकर आंखमूंद कर मान लेती थी, पर धीरे-धीरे उसका मन इससे उचटने लगा. इस बीच उसके पति की पोस्टिंग एक मेट्रो सिटी में हो गई. वहां नए- नए माहौल में तो कुछ समय तक पिछला क्रम ही चलता रहा पर धीरे-धीरे यह सिलसिला टूटने लगा. \n\n पहले तो संजना ने इस पर ध्यान नहीं दिया, पर जब गैप ज्यादा बढ़ा तो संजना ने तहकीकात करनी शुरू की. पति से पूछा तो उनसे कोई जवाब नहीं मिला. थक-हार कर उसने पति के दफ्तर में ही काम करने वाले एक शख्स, जिनकी बीवी अब उसकी सहेली थी\n\n और जिसकी सेक्स लाइफ भी मजेदार थी, उससे अपनी समस्या का जिक्र किया. उस सहेली ने अपने पति को अपने भरोसे में कर जब तहकीकात कराई तो पता चला कि पति महोदय जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ऑफिस जाते हैं, तो रास्ते और कार्यालय में सजी-संवरी, मॉडल टाइप की लड़कियों को देख कर किलसते हैं. ऐसे में उन्हें संजना को देख कर उस तरह से शरीर की भूख नहीं जगती जैसे पहले जगती थी. \n\n संजना का तो जैसे संसार ही लुट गया. आखिरकार उसने अपनी उसी सहेली से फिर सलाह और मदद मांगी. तब सहेली ने उसे कुछ टिप्स दिए. टिप्स कुछ इस तरह थे. अपने बेडौल होते शरीर की तरफ ध्यान दो. पति घर आए तो उससे सज संवर कर मिलो. उसके सामने हर समय घर-बार और बच्चों का रोना मत रोओ. अपने सोने की जगह को थोड़ा सेक्सी अंदाज में सजाओ. उनसे रोमांटिक बातें करो. शारीरिक चुहलबाजी भी जरूरी है. भूल कर भी इस तरह के ताने न मारो कि इनकी तो रोज ही इच्छा होती है. संजना ने सहीली की बात पर जैसे-जैसे अमल शुरू किया, उसकी सेक्स लाइफ वापस उसी हसीन पटरी पर लौट आई, जिसकी मीठी यादें किशोर उम्र में भी उसके तन-बदन में आग लगा देतीं थीं. \n\n

तनाव में सेक्स

पहले तो पास लेटते ही हमारे तन बदन में सिहरन होने लगती थी ,पर अब हमें संभोग से पहले सेक्सी वीडियो या फोटुओं...
' पहले तो पास लेटते ही हमारे तन बदन में सिहरन होने लगती थी, पर अब हमें संभोग से पहले सेक्सी वीडियो या फोटुओं का सहारा लेना पड़ता है,' कहना है 28 साल की नेहा का, जो बेंगलोर की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं. \n\n नौकरीपेशा शादीशुदा जोड़ों से बातचीत करने पर यह बात सामने आई है कि लोग अपनी डाइट के बाद अपनी सेक्स लाइफ को उपेक्षित करते हैं. तकरीबन 82 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे चोरी से पोर्न देख कर काम चलाते हैं. \n\n सेक्स से जुड़ी कमाल की बात यह है कि इनसान और डालफिन धरती पर पाए जाने वाले दो ऐसे जीव हैं जो अपने आनंद के लिए सेक्स का सहारा लेते हैं. ऐसा दावा किया जाता है कि मर्द औसतन हर एक सात सेकेंड में एक बार सेक्स के बारे में सोचता है. \n\n बात कितनी सच है इस पर चर्चा न भी करें तो यह तय है कि सेक्स करने से तनाव दूर भागता है. यह एक तरह की एक्सरसाइज भी है. जिससे हृदय रोग, मानसिक तनाव, ब्लड्प्रेशर से छुटकारा मिलता है. \n\n वैज्ञानिकों और डाक्टरों का भी कहना है कि सही तरीके यानी अच्छे दिल, दिमाग व मानसिकता से सेक्स करने पर आपके शरीर से फेरामोंस नामक रसायन निकलता है, जिसे वैज्ञानिकों की भाषा में सेक्स परफ्यूम कहा जाता है. यह सेक्स परफ्यूम दिल और दिमाग को असीम शांति व सुख देता है. \n\n यह भी एक अचरज की बात है कि मेट्रो सिटी में रहने वाले लोगों को छोड़ दें, तो देश में आज भी सेक्स को लेकर एक टैबू है. महिला पार्टनर अगर सेक्स के बारे में खुलकर बात करती है तो न केवल उसका ब्वॉयफ्रेंड, बल्कि उसका लाइफ पार्टनर तक उसे शक की निगाह से देखने लगता है. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. \n\n आपको यह समझना चाहिए कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में जब आप अपने ऑफिस को, काम को, दोस्तों को समय देते हैं, तो अपने घर वालों को, अपने पार्टनर को, अपने हमबिस्तर को भी बराबर तवज्जुह दें. उसके तन-मन की जरूरत को समझें. इससे न केवल आप का दिल और तन-मन खुश रहेगा, बल्कि आपके जीवन की बगिया भी महकती रहेगी. \n\n
Laoding...